लखनऊ । प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एक मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) कर लिया है। एजेंसी के अनुसार, कुर्क की गई इन संपत्तियों का पुस्तक मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई है। रामपुर के सिंहनखेड़ा गांव स्थित जौहर नगर में बना यह विश्वविद्यालय पूरी तरह से मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नियंत्रण में है, जिसके सर्वेसर्वा और मानद कुलाधिपति आजम खान हैं।
ईडी की यह जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज उन 26 प्राथमिकियों (FIR) पर आधारित है, जिनमें स्थानीय किसानों की कृषि भूमि को जबरन अधिग्रहित कर विश्वविद्यालय के लिए इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया गया था। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन की पड़ताल में यह बात भी उजागर हुई कि सिंहनखेड़ा गांव की लगभग 34 एकड़ शत्रु संपत्ति (Enemy Property) पर भी अवैध रूप से कब्जा जमाया गया था, जिसे बाद में शत्रु संपत्ति अभिरक्षक द्वारा वापस अधिग्रहित कर लिया गया। एजेंसी के अनुसार, 2016 में कई मकानों को जबरन गिराने, सरकारी ठेकेदारों के जरिए चंदे के नाम पर धन की हेरफेर करने तथा सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए आवंटित 23.41 करोड़ रुपये की सरकारी निधि का उपयोग इस निजी विश्वविद्यालय परिसर के बुनियादी ढांचे को विकसित करने में किए जाने के साक्ष्य मिले हैं।
मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर, पूरे विश्वविद्यालय परिसर की कुल निर्माण लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसमें 59 विशाल इमारतें और 114 भू-खंड शामिल हैं। हालांकि, ट्रस्ट ने आयकर रिकॉर्ड में केवल 78.32 करोड़ रुपये ही व्यय के रूप में दिखाए थे। गहन जांच के बाद ईडी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि कुल लागत में से केवल 72.63 करोड़ रुपये का स्रोत ही वैध साबित हो सका है, जबकि शेष 426.46 करोड़ रुपये की राशि को अपराध की आय (Proceeds of Crime) माना गया है। इसी आधार पर एजेंसी ने इस भारी भरकम राशि के बराबर की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। उल्लेखनीय है कि 19 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में की गई व्यापक छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण और अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए थे।








