राजस्थान में बोरवेल में गिरे 9 साल के भोमाराम को बचाने की कोशिश आखिरकार दुखद खबर के साथ खत्म हुई। करीब 39 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद परिवार में शोक छा गया और इलाके में मातम का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, भोमाराम करीब 640 फीट गहरे बोरवेल में फंस गया था। घटना की सूचना मिलते ही बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू किया गया। रेस्क्यू टीमों ने बच्चे तक पहुंचने और उसे बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए। लंबा समय बीतने के बावजूद बचाव दल ने उम्मीद नहीं छोड़ी और अभियान जारी रखा।
39 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, फिर भी नहीं बच सकी जान
भोमाराम को बचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार जुटी रहीं। बोरवेल के भीतर बच्चे तक पहुंचने में कई मुश्किलें आईं। बचाव अभियान के दौरान बच्चे से करीब 30 फीट ऊपर एक पत्थर फंसा हुआ था, जिसके कारण उपकरणों को नीचे पहुंचाने में परेशानी हो रही थी।
देसी जुगाड़ से हटाया गया रास्ते में फंसा पत्थर
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पारंपरिक तरीकों से सफलता नहीं मिलने पर स्थानीय विशेषज्ञ माधाराम सुथार और उनकी टीम की मदद ली गई। लोहे की सरियों से एक विशेष चिमटेनुमा उपकरण तैयार किया गया। इसकी मदद से बोरवेल में फंसे पत्थर को बाहर निकाला गया, जिसके बाद बच्चे को निकालने का प्रयास आगे बढ़ाया गया।
करीब 39 घंटे की मशक्कत के बाद शनिवार, 17 अक्टूबर की तड़के लगभग 3:35 बजे भोमाराम को बाहर निकाला गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
परिवार और गांव में पसरा मातम
भोमाराम को सुरक्षित वापस लाने की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों को उसकी मौत की खबर से गहरा सदमा लगा। लंबे समय तक चले बचाव अभियान के बावजूद बच्चे को नहीं बचाया जा सका। इस घटना से नौसर गांव और आसपास के इलाके में शोक का माहौल है।
खुले बोरवेल को लेकर फिर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाले खतरों की ओर ध्यान दिलाता है। खेतों या आबादी वाले इलाकों में बोरवेल का मुंह खुला छोड़ना बच्चों और आसपास के लोगों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए अनुपयोगी बोरवेल को सुरक्षित तरीके से बंद करना और खुले बोरवेल के आसपास सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
भोमाराम को बचाने के लिए की गई लंबी कोशिशों का अंत बेहद दुखद रहा। यह घटना बोरवेल की सुरक्षा को लेकर सतर्कता और जिम्मेदारी की जरूरत को फिर से सामने लाती है।








