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October 17, 2026 1:24 pm

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गुजरात के मेडिकल कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, मुस्लिम स्टाफ की मौजूदगी पर बजरंग दल ने जताई आपत्ति

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गुजरात के सूरत में गरबा आयोजन को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। नवरात्रि के दौरान आयोजित गरबा कार्यक्रम में मुस्लिम कर्मचारियों और कलाकारों की मौजूदगी पर बजरंग दल ने आपत्ति जताई। इस घटनाक्रम के बाद धार्मिक आयोजनों में भागीदारी, कलाकारों की नियुक्ति और सामाजिक सौहार्द को लेकर बहस तेज हो गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सूरत में गरबा आयोजन से जुड़ा यह विवाद मुस्लिम कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर उठा। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े लोगों ने आयोजकों के सामने अपनी आपत्ति रखी और गरबा कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं की भागीदारी पर रोक लगाने की मांग की। हालांकि, विवाद से जुड़े अलग-अलग आयोजनों और उनके स्थानों की जानकारी को अलग-अलग समझना जरूरी है।

बजरंग दल ने क्या कहा?

रिपोर्टों के मुताबिक, बजरंग दल के दक्षिण गुजरात प्रांत प्रचारक नीलेश अकबरी ने कहा कि गरबा आयोजनों में मुस्लिम कलाकारों और अन्य कर्मचारियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। संगठन की ओर से आयोजकों को इस संबंध में निर्देशों का पालन करने की बात कही गई। इससे पहले भी सूरत में गरबा कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम ढोल वादकों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई गई थी।

आयोजकों और कलाकारों की मौजूदगी पर उठा सवाल

गरबा गुजरात की प्रमुख सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है, जिसका आयोजन विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान किया जाता है। इन कार्यक्रमों में कलाकारों, संगीतकारों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कर्मचारियों के धर्म के आधार पर आपत्ति जताए जाने से आयोजन की व्यवस्था और सामाजिक समावेशिता पर चर्चा शुरू हो गई है।

विवाद के बीच पुलिस की भूमिका

इस तरह के विवादों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी होती है। आयोजकों और विरोध करने वाले समूहों के बीच किसी भी तरह के तनाव को रोकने के लिए पुलिस को स्थिति पर नजर रखनी पड़ती है। किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में रहकर किया जाना जरूरी है।

गरबा विवाद ने फिर बढ़ाई बहस

सूरत का यह मामला गुजरात में गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की भागीदारी को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है। एक ओर कुछ हिंदू संगठन गरबा को धार्मिक परंपरा बताते हुए आयोजन में गैर-हिंदुओं की भागीदारी पर प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर धार्मिक आधार पर भेदभाव और सामाजिक सौहार्द को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल, इस घटनाक्रम से जुड़े सभी तथ्यों और आयोजन के सटीक स्थान की पुष्टि जरूरी है। मामले में किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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