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September 12, 2026 4:05 pm

बाब-अल-मंदेब पर हूतियों का कब्जा बढ़ा सकता है भारत की टेंशन, 3000 KM दूर से तेल कारोबार पर असर!

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों की बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती पकड़ ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, हूती बलों ने रणनीतिक पेरिम (मयून) द्वीप पर नियंत्रण हासिल किया है, जो बाब-अल-मंदेब के मुहाने पर स्थित है। यह मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?

भारत से करीब 3,000 किलोमीटर दूर चल रहे इस घटनाक्रम का असर भारतीय अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। बाब-अल-मंदेब के रास्ते पश्चिम एशिया से भारत आने वाले कच्चे तेल और अन्य सामान की आवाजाही होती है। यदि इस समुद्री मार्ग पर असुरक्षा बढ़ती है या जहाजों को वैकल्पिक लंबे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है, तो शिपिंग लागत और यात्रा समय बढ़ सकता है।

तेल की कीमतों पर भी नजर

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पहले ही दबाव में है। रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गई हैं। बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर लगातार तनाव रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता और बढ़ सकती है।

सिर्फ तेल नहीं, व्यापार पर भी असर

बाब-अल-मंदेब एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां जोखिम बढ़ने पर जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ सकता है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो सकती है। इसका असर तेल के अलावा दूसरे आयात-निर्यात कारोबार पर भी पड़ने की आशंका है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हूतियों की बढ़ती पकड़ पूरे समुद्री मार्ग की सुरक्षा को प्रभावित करती है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत एशिया और यूरोप के व्यापार पर भी पड़ सकता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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