HDFC Bank में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट देखने को मिली है। सितंबर 2023 में बैंक में FII हिस्सेदारी 52.13% थी, जो जून 2026 तक घटकर 41.82% रह गई। यानी करीब तीन साल में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 10.31 प्रतिशत अंक कम हुई है।
एक तिमाही में भी बड़ी गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में HDFC Bank में FII हिस्सेदारी 44.05% थी, जो जून 2026 में घटकर 41.82% रह गई। यानी सिर्फ एक तिमाही में करीब 2.23 प्रतिशत अंक की कमी आई। वहीं, इसी दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है।
मर्जर के बाद क्यों बढ़ी चिंता?
HDFC Ltd के साथ मर्जर के बाद बैंक का बैलेंस शीट काफी बड़ा हुआ। इसके साथ ही निवेशकों का ध्यान ग्रोथ, मार्जिन, फंडिंग और लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो जैसे मुद्दों पर गया है। बैंक को डिपॉजिट जुटाने और रिटर्न रेशियो में सुधार की दिशा में भी काम करना पड़ रहा है।
नेतृत्व में बदलाव भी बना मुद्दा
विदेशी निवेशकों की सावधानी की एक वजह बैंक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अनिश्चितता भी बताई जा रही है। निवेशक यह देख रहे हैं कि बैंक मर्जर के बाद अपनी पुरानी ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की रफ्तार कितनी जल्दी हासिल कर पाता है।
क्या यह HDFC Bank के लिए खतरे की घंटी है?
FII हिस्सेदारी में गिरावट निश्चित तौर पर निवेशकों के लिए ध्यान देने वाला संकेत है, लेकिन इसे अकेले बैंक की कमजोरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार म्यूचुअल फंड समेत घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है, जबकि बैंक की एसेट क्वालिटी और बैंकिंग सेक्टर की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक पहलू भी मौजूद हैं। इसलिए निवेशकों के लिए बैंक की आगे की ग्रोथ, मार्जिन और मर्जर के बाद प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
नोट: यह खबर निवेश संबंधी सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश से पहले स्वतंत्र वित्तीय सलाह लेना उचित है।








