नई दिल्ली: बीजेपी नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की ओर से दायर मानहानि मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। मामला सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक कथित AI-जनरेटेड फर्जी ग्राफिक से जुड़ा है, जिसमें भाटिया के नाम से आपत्तिजनक बयान प्रसारित किए गए थे। भाटिया ने इसे फर्जी बताते हुए CJP से जुड़े नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
भाटिया ने इस मामले में 2 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। उनकी याचिका में CJP के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को प्रतिवादी बनाया गया था। आरोप था कि कथित फर्जी सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा और आगे प्रसारित किया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
AI से तैयार कथित फर्जी पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसे सौरव दास ने साझा किया था। इसमें गौरव भाटिया के नाम से एक कथित बयान दिखाया गया था। भाटिया ने पोस्ट को फर्जी बताते हुए इसे हटाने और बिना शर्त माफी की मांग की। बाद में पोस्ट हटाई गई, लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ और मामला अदालत तक पहुंच गया।
अदालत ने क्या कहा?
10 सितंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से साझा की गई पोस्ट को लेकर टिप्पणी की। अदालत ने बिना पुष्टि के किसी व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को उचित नहीं बताया और पोस्ट हटाने की सलाह दी। सौरव दास ने एक पोस्ट हटाने की पुष्टि भी की।
वहीं, अभिजीत दीपके को इस याचिका से हटा दिया गया, क्योंकि अदालत के सामने उनके खिलाफ इस मामले में कोई आरोप नहीं था। इससे स्पष्ट है कि अदालत में हर प्रतिवादी की भूमिका को अलग-अलग आधार पर देखा गया।
CJP का भी याचिका में जिक्र
गौरव भाटिया की याचिका में CJP और उसके नेताओं को भी पक्ष बनाया गया था। मामला अब सोशल मीडिया की बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है। अदालत में आगे की कार्रवाई तथ्यों, उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि सोशल मीडिया पर कथित फर्जी AI सामग्री साझा करने का विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां अदालत यह देख रही है कि संबंधित पोस्ट और उसके प्रसार में किसकी क्या भूमिका थी।








