उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी की प्रतिमा इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, लेकिन आधुनिक मशीनों और तकनीकी प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिल सकी। अब इस मामले को केवल तकनीकी चुनौती के तौर पर नहीं, बल्कि संभावित ऐतिहासिक महत्व के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
1000 साल पुरानी होने की संभावना
पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। विशेषज्ञों ने इसके निर्माण में इस्तेमाल पत्थर को मालवा क्षेत्र में मिलने वाला मजबूत बेसाल्ट पत्थर बताया है। प्रतिमा की बनावट और क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भों को देखते हुए इसके तार परमार काल और राजा भोज के दौर से जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसकी वास्तविक उम्र को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।
वैज्ञानिक जांच के बाद सामने आएगा असली इतिहास
प्रतिमा पर लंबे समय से सिंदूर की परत चढ़ी होने के कारण उसके मूल शिल्प और निर्माण शैली का अध्ययन आसान नहीं है। ऐसे में विशेषज्ञ वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच के जरिए प्रतिमा की उम्र, पत्थर और उसकी संरचना से जुड़े तथ्यों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा वास्तव में कितनी पुरानी है और इसका संबंध किस ऐतिहासिक काल से है।
जमीन के अंदर कितना गहरा है आधार?
प्रतिमा के नहीं हिलने की एक बड़ी वजह उसका मजबूत आधार भी माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार संभव है कि प्रतिमा जमीन के भीतर काफी गहराई तक स्थापित हो और उसका आधार किसी प्राचीन तकनीक से तैयार किया गया हो। यही कारण है कि इसे बिना नुकसान पहुंचाए हटाना बेहद जटिल साबित हो रहा है। प्रतिमा की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन अब जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहता।
IIT विशेषज्ञों की भी ली जा रही मदद
प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से समझने और उसके आधार की तकनीकी स्थिति जानने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक IIT इंदौर के विशेषज्ञ भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का अध्ययन कर चुके हैं। प्रशासन की कोशिश है कि प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना आगे की प्रक्रिया तय की जाए।
मंदिर और प्रतिमा का इतिहास अलग-अलग हो सकता है
बताया जाता है कि मौजूदा खड़े हनुमान मंदिर को करीब 170 साल पुराना माना जाता है। वहीं प्रतिमा के लगभग 1000 साल पुरानी होने की संभावना सामने आई है। यानी मंदिर की वर्तमान संरचना और प्रतिमा का निर्माण अलग-अलग समय में हुआ हो सकता है। इसी वजह से अब इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ प्रतिमा की वास्तविक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जानने में जुटेंगे।
फिलहाल विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार
प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से प्रतिमा के नहीं हिलने को किसी चमत्कार का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं बताया गया है। फिलहाल प्राथमिकता प्रतिमा की सुरक्षा और उसके ऐतिहासिक महत्व की सही जांच करना है। प्रशासन ने भी विशेषज्ञों की जांच और संबंधित पक्षों की सहमति के बाद ही आगे फैसला लेने की बात कही है।
यानी उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा के पीछे छिपा इतिहास अगर जांच में करीब 1000 साल पुराना साबित होता है, तो यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ मालवा और उज्जैन के इतिहास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण खोज साबित हो सकती है।








