भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय मुलाकात से पहले Su-57 फाइटर जेट का मुद्दा बातचीत के अहम विषयों में शामिल हो गया है। क्रेमलिन ने भी पुष्टि की है कि भारत को Su-57 बेचने का मुद्दा दोनों देशों के एजेंडे में है।
मोदी-पुतिन की बैठक में Su-57 पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात 11 सितंबर को होने की उम्मीद है। यह बैठक नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रस्तावित है। रूस की ओर से कहा गया है कि दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे पर बातचीत करेंगे, जिसमें रक्षा और आर्थिक सहयोग के साथ Su-57 की संभावित बिक्री भी शामिल है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, रूस और भारत के बीच Su-57 से जुड़ी तकनीक के हस्तांतरण पर भी बातचीत चल रही है। भारत की ओर से स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहयोग और उत्पादन से जुड़े विकल्पों पर जोर दिए जाने की बात सामने आई है।
75 Su-57 की चर्चा, लेकिन अंतिम डील अभी नहीं
रक्षा क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्टों में भारत द्वारा बड़ी संख्या में Su-57 विमान लेने की संभावनाओं की चर्चा है। कुछ रिपोर्टों में 75 विमानों और करीब ₹1 लाख करोड़ तक के संभावित सौदे का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अभी तक भारत या रूस की ओर से इतनी संख्या और इतनी कीमत वाली अंतिम खरीद डील की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इसलिए फिलहाल इसे संभावित रक्षा सौदे के तौर पर ही देखा जा रहा है। मोदी-पुतिन की बैठक के बाद तस्वीर ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।
रूस क्यों कर रहा है Su-57 पर जोर?
रूस लंबे समय से भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 विमान के विकल्प पर विचार करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। रूस की तरफ से विमान के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उत्पादन जैसे विकल्पों पर भी चर्चा की गई है।
भारत के लिए भी इस चर्चा का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि देश अपने स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर काम कर रहा है। ऐसे में रूस Su-57 को अंतरिम विकल्प के तौर पर पेश करता रहा है। हालांकि, भारत ने अतीत में Su-57 को लेकर तत्काल खरीद के विकल्प को आगे नहीं बढ़ाया था।
सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं, कई मुद्दों पर होगी बातचीत
मोदी और पुतिन की प्रस्तावित बैठक का एजेंडा केवल Su-57 तक सीमित नहीं रहने वाला है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार, परमाणु ऊर्जा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।
रूस की ओर से भारत के साथ नई परमाणु परियोजनाओं और Su-57 तकनीक से जुड़े सहयोग को लेकर बातचीत जारी होने की जानकारी दी गई है।
BRICS से पहले अहम मुलाकात
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन होना है। इससे पहले मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय बैठक को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बैठक में Su-57 को लेकर सिर्फ बातचीत आगे बढ़ेगी या दोनों देश किसी बड़े समझौते की दिशा में कदम उठाएंगे। फिलहाल आधिकारिक तौर पर Su-57 की बिक्री एजेंडे में होने की पुष्टि है, लेकिन 75 विमानों की खरीद और ₹1 लाख करोड़ की डील को अंतिम समझौता मानना जल्दबाजी होगी।








