त्योहारों का सीजन शुरू होते ही मिठाई खरीदने वालों की जेब पर महंगाई का असर दिखने लगा है। चीनी और गुड़ की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद मिठाई बनाने की लागत बढ़ गई है। इसका असर लड्डू, पेड़ा, बर्फी और दूसरी मिठाइयों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
चीनी के दाम बढ़ने से बढ़ी मिठाई की लागत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर की शुरुआत में देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब ₹60.78 प्रति किलो और गुड़ का भाव करीब ₹66.90 प्रति किलो था। अगस्त के दौरान चीनी की कीमतों में काफी तेजी आई थी। हालांकि हाल के दिनों में चीनी के भाव में कुछ नरमी भी आई है, लेकिन कीमतें अभी भी सामान्य स्तर से ऊपर बनी हुई हैं।
मिठाई बनाने में चीनी का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में होता है। ऐसे में कच्चे माल की कीमत बढ़ने पर हलवाई और मिठाई कारोबारियों की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। इसके अलावा दूध, खोया, घी और ड्राई फ्रूट्स जैसी सामग्री महंगी होने से लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
पेड़ा और दूसरी मिठाइयों पर दिखा असर
पुणे में मिठाई कारोबारियों के मुताबिक दूध और चीनी की बढ़ती कीमतों के कारण पेड़े समेत लगभग सभी मिठाइयों के भाव बढ़े हैं। एक कारोबारी ने बताया कि पेड़े की कीमत पहले करीब ₹550-560 प्रति किलो थी, जो बढ़कर ₹750-780 प्रति किलो तक पहुंच गई। हालांकि अलग-अलग शहरों और दुकानों में कीमतें अलग हो सकती हैं।
लड्डू, बर्फी, पेड़ा, रसगुल्ला और अन्य चीनी आधारित मिठाइयों पर भी लागत बढ़ने का दबाव है। कुछ दुकानदार बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं, जबकि कुछ कारोबारी फिलहाल अपने मुनाफे में कटौती करके कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
चीनी-गुड़ के साथ ये चीजें भी महंगी
मिठाई कारोबारियों के लिए परेशानी सिर्फ चीनी और गुड़ तक सीमित नहीं है। दूध और उससे बने उत्पादों के अलावा ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी ने लागत बढ़ाई है। कुछ मिठाई दुकानों में उत्पादन लागत करीब 10 फीसदी तक बढ़ने की बात सामने आई है।
यानी त्योहारों पर मिठाई खरीदते समय ग्राहकों को इस बार पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
क्यों बढ़े चीनी के दाम?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार घरेलू उत्पादन उम्मीद से कम रहना, त्योहारों से पहले मांग बढ़ना, गन्ने की फसल पर मौसम का असर और वैश्विक सप्लाई की स्थिति जैसे कारणों ने कीमतों पर दबाव बनाया। सरकार ने यह भी कहा है कि हालिया तेजी को सीधे एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है।
सरकार के कदम से मिल सकती है राहत
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक सीमा जैसे कदम उठाए हैं। इन उपायों के बाद बाजार में चीनी की कीमतों में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। सितंबर की शुरुआत में औसत खुदरा कीमत में करीब 3.85 फीसदी की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई थी।
हालांकि मिठाई की कीमतों में राहत तुरंत दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। कारोबारियों को पहले से महंगे खरीदे गए दूध, चीनी, गुड़ और अन्य कच्चे माल की लागत भी निकालनी होती है।
त्योहारों में और बढ़ सकती है मांग
नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाई की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में चीनी की खपत भी बढ़ने की संभावना रहती है। अगर मांग बढ़ने के साथ कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो मिठाइयों के दाम पर दबाव जारी रह सकता है।
फिलहाल तस्वीर यह है कि चीनी और गुड़ की महंगाई ने मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ा दी है और इसका असर धीरे-धीरे ग्राहकों की जेब तक पहुंच रहा है। हालांकि आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों में कितनी राहत मिलती है, इसी पर मिठाइयों के दामों का अगला रुख काफी हद तक निर्भर करेगा।







