प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी विकास की रफ्तार कायम रखी है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की GDP ग्रोथ दर्ज की है और यह प्रदर्शन दुनिया के लिए भरोसे और नए अवसरों का स्रोत बन रहा है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ बातचीत के बाद भारत-बेल्जियम संबंधों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बात की। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया कई तरह की चुनौतियों और संघर्षों से गुजर रही है। इसका असर भोजन, ईंधन और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है।
इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी गति बनाए रखी है। पीएम मोदी ने 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि को भारत की मजबूती और विकास क्षमता से जोड़ते हुए कहा कि देश की ग्रोथ स्टोरी वैश्विक स्तर पर विश्वास पैदा कर रही है।
7.8% GDP ग्रोथ क्यों है खास?
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस आंकड़े को वैश्विक व्यवधानों के बीच उल्लेखनीय प्रदर्शन बताया है और भारत को प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले भी 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ को लेकर कहा था कि मजबूत आंकड़े मजबूत भरोसे को दर्शाते हैं। सरकार का कहना है कि आर्थिक प्रदर्शन भारत की क्षमता और सुधारों के असर को दिखाता है।
बेल्जियम के साथ आर्थिक साझेदारी पर जोर
पीएम मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की मुलाकात में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत और बेल्जियम ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की दिशा में भी काम करने पर जोर दिया है। इससे दोनों देशों के कारोबारी और निवेश संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत पर बढ़ता भरोसा
दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर जोर दे रहा है। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, सुधारों और निवेश के अवसरों से भारत को वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपनी विकास यात्रा जारी रखने में मदद मिल सकती है।
पीएम मोदी ने भारत की ग्रोथ को केवल देश की आर्थिक उपलब्धि के रूप में नहीं बल्कि दुनिया के लिए अवसर के तौर पर पेश किया। उनके मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।
GDP के आंकड़ों पर उठे सवाल भी चर्चा में
हालांकि 7.8 प्रतिशत की GDP ग्रोथ को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों के बीच बहस भी शुरू हुई है। कुछ पूर्व अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों ने GDP की नई गणना पद्धति और महंगाई के आंकड़ों से जुड़े सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, सरकार ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि नए GDP आंकड़े संशोधित आधार वर्ष और बेहतर डेटा स्रोतों पर आधारित हैं।
सरकार के अनुसार, GDP की नई सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है और कीमतों को मापने के लिए अधिक विस्तृत डेटा का इस्तेमाल किया गया है। सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा है कि 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा नई पद्धति और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सही है।
सरकार के लिए आगे की चुनौती
7.8 प्रतिशत की ग्रोथ निश्चित तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन आने वाले समय में इस रफ्तार को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। वैश्विक व्यापार, ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में होने वाले बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके साथ ही आर्थिक विकास का लाभ रोजगार, निवेश और आम लोगों की आय में किस हद तक दिखाई देता है, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा। GDP के मजबूत आंकड़ों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को मजबूत करना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
पीएम मोदी का संदेश क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ है कि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भारत अपनी विकास यात्रा को लेकर आश्वस्त है। 7.8 प्रतिशत की GDP ग्रोथ को उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता और दुनिया के भरोसे से जोड़ते हुए कहा कि देश की ग्रोथ स्टोरी नए अवसर पैदा कर रही है।
हालांकि GDP के आंकड़ों की व्याख्या को लेकर आर्थिक बहस जारी है, लेकिन सरकार का जोर इस बात पर है कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी आर्थिक मजबूती बनाए रखे और निवेश, व्यापार तथा तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खोले।








