झालावाड़: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच भवानीमंडी से बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व पालिका अध्यक्ष रामलाल गुर्जर ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उनके साथ उनकी बहू और पूर्व पालिका अध्यक्ष पिंकी गुर्जर तथा पूर्व पार्षद सुगना गुर्जर के भी कांग्रेस में शामिल होने की खबर है। चुनाव से ठीक पहले एक ही परिवार के प्रमुख राजनीतिक चेहरों के पाला बदलने से स्थानीय सियासी समीकरणों पर असर पड़ने की चर्चा तेज हो गई है।
करीब 40 साल से BJP से जुड़े थे रामलाल गुर्जर
रिपोर्ट के मुताबिक, रामलाल गुर्जर लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि वह करीब 40 वर्षों तक भाजपा के साथ रहे। हाल ही में उन्हें नगर पालिका चुनाव के लिए बनाई गई भाजपा की 11 सदस्यीय चुनाव समिति में भी शामिल किया गया था। ऐसे समय में उनका पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
रामलाल गुर्जर ने कांग्रेस में शामिल होने की वजह बताते हुए कहा कि उन्हें वहां सम्मान और स्नेह मिला, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस के साथ जाने का निर्णय लिया।
बहू पिंकी गुर्जर भी कांग्रेस में शामिल
रामलाल गुर्जर के साथ उनकी बहू पिंकी गुर्जर ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पिंकी गुर्जर पूर्व पालिका अध्यक्ष रह चुकी हैं। परिवार के कई राजनीतिक चेहरों के एक साथ कांग्रेस में जाने से भवानीमंडी में चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत किया। इस दौरान स्थानीय कांग्रेस संगठन से जुड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
चुनाव से ठीक पहले BJP को झटका
रामलाल गुर्जर का भाजपा छोड़ना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह घटनाक्रम नगर निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में सामने आया है। ऐसे समय में किसी वरिष्ठ नेता का पार्टी बदलना स्थानीय उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
भवानीमंडी नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं और इस बार भाजपा-कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी तथा निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। कई वार्डों में बहुकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।
टिकट को लेकर भी चर्चा
स्थानीय रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक दलों में अंतिम समय तक मंथन चल रहा है। ऐसे में रामलाल गुर्जर और उनके परिवार के कांग्रेस में जाने को स्थानीय चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, उनके कांग्रेस में शामिल होने के पीछे टिकट से जुड़ी परिस्थितियों की चर्चा भी है, लेकिन रामलाल गुर्जर ने सार्वजनिक रूप से अपने फैसले की वजह सम्मान और स्नेह को बताया है।
45 वार्डों में बहुकोणीय मुकाबले के आसार
भवानीमंडी नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के साथ-साथ आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 45 वार्डों में 250 से ज्यादा उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की संभावना है। ऐसे में कई वार्डों में त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।
इन 9 वार्डों पर रहेगी खास नजर
नगर परिषद में सभापति पद ओबीसी के लिए आरक्षित होने के कारण नौ ओबीसी वार्डों का महत्व बढ़ गया है। इनमें वार्ड 4, 12, 14, 17, 26, 33 और ओबीसी महिला वर्ग के 1, 8 और 21 वार्ड शामिल बताए गए हैं। इन वार्डों के परिणाम बोर्ड गठन और सभापति पद के समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
रामलाल गुर्जर, पिंकी गुर्जर और सुगना गुर्जर के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका चुनावी असर कितना दिखाई देगा। क्या कांग्रेस इस राजनीतिक बदलाव को वोट में बदल पाएगी या भाजपा अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर नुकसान की भरपाई कर लेगी, इसका फैसला चुनाव परिणाम के बाद होगा।
फिलहाल इतना तय है कि भवानीमंडी में नामांकन के अंतिम दौर में हुए इस बड़े राजनीतिक बदलाव ने नगर निकाय चुनाव को और रोचक बना दिया है। एक तरफ भाजपा अपने पुराने संगठन को मजबूत रखने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस गुर्जर परिवार के इस पाला बदलने को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।








