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August 30, 2026 2:56 pm

अखिलेश के सामने जयंत चौधरी की नई चुनौती! जाट के बाद ब्राह्मण वोट साधने की तैयारी, लखनऊ में बड़ा सम्मेलन

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उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अपने पारंपरिक जाट आधार से आगे बढ़कर ब्राह्मण समाज के बीच भी पार्टी की पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर जोर दिया है। 30 अगस्त को लखनऊ में RLD का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसे पार्टी के संगठन विस्तार और नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

लखनऊ सम्मेलन में दिखा RLD का शक्ति प्रदर्शन

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए सम्मेलन को RLD के लिए खास माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम में करीब 1,500 ब्राह्मणों को जुटाने की तैयारी की गई थी। पूर्वांचल के ब्राह्मण नेता बीके शुक्ला की मौजूदगी भी इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से अहम बनाती है। मंच पर जयंत चौधरी के स्वागत के दौरान 21 बटुकों द्वारा स्वस्तिवाचन की भी तैयारी थी।

यह जयंत चौधरी का लखनऊ में पार्टी का बड़े स्तर पर आयोजित प्रमुख सम्मेलन माना जा रहा है। इसके जरिए RLD ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अपनी पारंपरिक राजनीति से आगे निकलकर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी संगठन मजबूत करने का संकेत दिया है।

जाट के साथ ब्राह्मण समीकरण पर फोकस

RLD की पहचान लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट राजनीति से जुड़ी रही है। पार्टी अब जाट और गुर्जर समुदाय के साथ ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति का मकसद अपने पारंपरिक वोट आधार को व्यापक सामाजिक गठबंधन में बदलना है।

RLD की यह कवायद ऐसे समय हो रही है, जब उत्तर प्रदेश की प्रमुख पार्टियां 2027 के चुनाव को देखते हुए अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हैं। ऐसे में ब्राह्मण समाज पर जयंत चौधरी का फोकस आने वाले चुनाव की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

अखिलेश यादव से बढ़ी राजनीतिक दूरी

जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच हाल के दिनों में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। दोनों नेताओं के बीच जाट समुदाय और राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी तीखी टिप्पणियां सामने आई हैं।

इसी बीच अखिलेश यादव भी ब्राह्मण समाज के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में RLD का लखनऊ में ब्राह्मणों की बड़ी भागीदारी वाला सम्मेलन सपा के लिए भी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

सिर्फ पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं रहना चाहती RLD

RLD की रणनीति अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित रहने के बजाय प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में संगठन का विस्तार करने की है। पार्टी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर भी जोर दे रही है।

पार्टी की कोशिश चौधरी चरण सिंह की किसान हित, सामाजिक न्याय और सर्वसमावेशी राजनीति की विरासत को आधार बनाकर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को जोड़ने की बताई जा रही है। इससे RLD अपने पारंपरिक जाट वोट बैंक से आगे एक व्यापक राजनीतिक आधार तैयार करना चाहती है।

2027 के चुनाव में कितना असर पड़ेगा?

अभी विधानसभा चुनाव में समय है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि RLD की ब्राह्मण आउटरीच से चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा। लेकिन इतना जरूर है कि जयंत चौधरी ने पार्टी के सामाजिक आधार को विस्तार देने की कोशिश तेज कर दी है।

लखनऊ का सम्मेलन इसी रणनीति का संकेत माना जा रहा है। अगर RLD जाट, गुर्जर, ब्राह्मण और अन्य सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल होती है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में भी पार्टी की भूमिका पर नजर रहेगी।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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