IIT दिल्ली में 31 वर्षीय MSc फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में छात्रों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद IIT दिल्ली परिसर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और मामले की स्वतंत्र जांच तथा संस्थागत जवाबदेही की मांग की। इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत बताई है।
अभिजीत दिपके ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर IITs में छात्रों की मौतों का आंकड़ा सामने रखते हुए कहा कि देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अगर छात्रों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, तो शिक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा जरूरी है। उन्होंने पूरे शिक्षा तंत्र में बदलाव की मांग करते हुए ऐसे माहौल की जरूरत बताई, जहां छात्र खुद को सुरक्षित, सुना हुआ और भविष्य को लेकर आश्वस्त महसूस करें।
दिपके ने अपने बयान में IITs में पिछले पांच वर्षों के दौरान 65 छात्र आत्महत्याओं का दावा किया। यह आंकड़ा उन्होंने अपनी टिप्पणी के संदर्भ में साझा किया है; ऐसे मामलों के आंकड़ों और कारणों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग संस्थानों के रिकॉर्ड के आधार पर देखी जानी चाहिए।
IIT दिल्ली में छात्रों ने किया विरोध
ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद IIT दिल्ली के छात्रों में नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच, जवाबदेही और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता की मांग की। छात्रों ने संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, अकादमिक समस्याओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए।
प्रदर्शन के बाद IIT दिल्ली ने मामले की जांच के लिए बाहरी समिति गठित करने का फैसला किया। समिति को घटना से जुड़े हालात और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा कर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई।
IIT दिल्ली ने गठित की बाहरी जांच समिति
IIT दिल्ली ने कहा है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र बाहरी जांच कराई जाएगी। संस्थान ने यह भी बताया कि छात्रों के लिए पहले से काउंसलर और मनोचिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था उपलब्ध है। संस्थान के अनुसार, परिसर में ऑन-कैंपस काउंसलर और मनोचिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हैं तथा इन सेवाओं को और मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा छात्रों की उन शिकायतों को सुनने के लिए एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिनका समाधान मौजूदा आंतरिक व्यवस्था से नहीं हो पाता।
अब जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर
इस मामले में फिलहाल कई सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। पुलिस ने घटना से जुड़े मामले में जांच शुरू की है, जबकि IIT दिल्ली की बाहरी समिति संस्थान से संबंधित परिस्थितियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी।
IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों पर अकादमिक दबाव, भविष्य की चिंता और व्यक्तिगत परिस्थितियों का असर पड़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ लंबे समय से बेहतर काउंसलिंग, समय पर सहायता और छात्रों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनने वाली व्यवस्था की जरूरत पर जोर देते रहे हैं।
अभिजीत दिपके के बयान ने इसी व्यापक बहस को फिर सामने ला दिया है कि देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में केवल अकादमिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।








