उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित चित्रकूट में भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से रामघाट समेत कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, नदी का जलस्तर करीब 26 से 30 फीट तक उफान पर पहुंचा और कई घाट, मंदिर, दुकानें तथा घर पानी की चपेट में आ गए।
300 फीट लंबा पुल बाढ़ में बहा
बाढ़ की तेज धार ने हनुमान धारा क्षेत्र में बने करीब 300 फीट लंबे पुल को भी नुकसान पहुंचाया और उसके बह जाने की खबर सामने आई है। इसके अलावा रामघाट और नयागांव क्षेत्र के पुलों पर भी पानी का दबाव बढ़ गया। कई जगहों पर सड़क संपर्क बाधित होने से लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है।
रामघाट और मंदिरों में घुसा पानी
मंदाकिनी का पानी बढ़ने से प्रसिद्ध रामघाट पूरी तरह जलमग्न हो गया। घाट के आसपास स्थित मंदिरों, आश्रमों और दुकानों में भी पानी पहुंच गया। कई निचले इलाकों में घरों के अंदर तक पानी आने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों और ऊंची जगहों पर जाने को मजबूर होना पड़ा।
रेलवे ट्रैक पर भी पानी
बाढ़ का असर रेल और सड़क यातायात पर भी पड़ा है। चित्रकूट और आसपास के इलाकों में रेलवे ट्रैक पर पानी भरने की खबर है। वहीं कई प्रमुख सड़कों पर भी पानी बहने के कारण प्रशासन ने आवाजाही रोकने और बैरिकेडिंग लगाने जैसे कदम उठाए हैं।
रेस्क्यू के लिए दो हेलिकॉप्टर तैनात
हालात बिगड़ने के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। दो हेलिकॉप्टरों को चित्रकूट भेजा गया, जिनकी मदद से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है। SDRF और अन्य राहत दल भी प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं।
बांध टूटने के बाद बढ़ी मुश्किल
सतना-चित्रकूट क्षेत्र में भारी बारिश के बीच गोरगी बांध टूटने की सूचना ने हालात को और गंभीर कर दिया। इसके बाद मंदाकिनी और आसपास के जलस्रोतों में पानी बढ़ा और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। कुछ जगहों पर सड़कों पर नावों की मदद लेने की नौबत तक आ गई।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत शिविर बनाए हैं और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं। फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी स्थिति की समीक्षा की है और राहत कार्यों पर नजर रखी जा रही है।
फिलहाल मंदाकिनी का जलस्तर कम होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सतर्कता बनाए रखी है। चित्रकूट में बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया है कि लगातार भारी बारिश और अचानक बढ़ते नदी के जलस्तर से नदी किनारे बसे इलाकों में कितनी तेजी से हालात बदल सकते हैं।








