पाकिस्तान के रणनीतिक और बेहद संवेदनशील परमाणु ठिकाने (Nuclear Site) ‘किराना हिल्स’ (Kirana Hills) पर हमले की खबरों को लेकर उठे सस्पेंस पर भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) का बड़ा बयान सामने आया है।
ऑपरेशन के करीब 15 महीने बाद विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) के एक कार्यक्रम में पूर्व CDS ने खुलासा किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने किराना हिल्स या वहां मौजूद किसी परमाणु संयंत्र को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना द्वारा भेजे गए एक ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ (आत्मघाती ड्रोन) का निशाने से चूककर इस इलाके से टकराने की प्रबल संभावना थी।
क्या है पूरा मामला? कैसे किराना हिल्स की तरफ गिरा म्यूनिशन?
पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना और सेना ने निचले वायुक्षेत्र (Lower Airspace) का रणनीतिक इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के सरगोधा में मौजूद रडार प्रणालियों को नष्ट करने का प्लान बनाया था।
पूर्व CDS का बयान:
“हमले से पहले हमने सरगोधा और उसके आसपास के इलाकों में कई लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से महज 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इन हथियारों की एक निश्चित समयावधि होती है (लगभग 2 घंटे)। अगर इस दौरान उन्हें तय रडार या टारगेट नहीं मिलता, तो ईंधन खत्म होने पर वे खुद-ब-खुद नीचे गिरकर टकरा जाते हैं। संभवतः ऐसा ही एक हथियार किराना हिल्स की पहाड़ियों से जा टकराया होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि इसी घटना के बाद पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स की पहाड़ियों से धुआं उठने की तस्वीरें प्रसारित की गई थीं, जिससे यह भ्रम फैला कि भारत ने पाक के न्यूक्लियर बेस को निशाना बनाया है।
पाक की ‘सीजफायर’ गुहार के बाद भी भारत ने दी थी स्ट्राइक की मंजूरी
पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने इस बात का भी सनसनीखेज खुलासा किया कि जब पाकिस्तान युद्ध रोकने और बातचीत (Talks) के लिए गिड़गिड़ा रहा था, तब भी भारत आक्रामक मूड में था।
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सुबह 10 बजे का घटनाक्रम: जब पाकिस्तान के डीजीएमओ की तरफ से फोन कर बातचीत की पहल की गई, ठीक उसी समय भारतीय वायुसेना प्रमुख ने CDS से सरगोधा पर हमले की मंजूरी मांगी।
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‘गो अहेड’ का आदेश: CDS ने बिना झिझक के एयर चीफ को स्ट्राइक के लिए हरी झंडी दिखाई और दो अन्य वैकल्पिक ठिकानों की पहचान करने को कहा।
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टारगेट में बदलाव: Skardu को बैकअप टारगेट चुना गया था, लेकिन खराब मौसम की वजह से अंतिम क्षणों में निशाना बदलकर भोलारी कर दिया गया।
रणनीतिक संदेश: पूर्व CDS ने स्पष्ट कहा कि भारतीय सिद्धांत बहुत साफ था—“आखिरी हमला और निर्णायक प्रहार हमेशा भारत की ओर से ही होगा, पाकिस्तान की तरफ से नहीं।”
पाकिस्तान को अपने ही नुकसान की खबर तक नहीं थी
सैन्य तैयारियों पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए पूर्व CDS ने बताया कि भारतीय एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान को कई दिनों तक यही अंदाजा नहीं था कि उसके ठिकानों पर कितना नुकसान हुआ है।
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पाकिस्तान 10 से 12 मई तक अमेरिकी और चीनी कंपनियों से कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें जुटाने की नाकाम कोशिश करता रहा।
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पाकिस्तानी एयर डिफेंस और रडार प्रणाली पूरी तरह विफल हो चुकी थी।
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चीन के सैटेलाइट्स की मदद लेने के बावजूद पाकिस्तान सटीक डेटा हासिल नहीं कर सका।
निष्कर्ष
पूर्व CDS अनिल चौहान के इस विस्तृत खुलासे ने न केवल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान किराना हिल्स पर उठ रहे धुएं का सच सामने ला दिया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि भारतीय सेना ने आधुनिक तकनीकों और निचले वायुमंडल का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के रक्षा कवच को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।








