भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की कोशिशों के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान के बड़े वित्तीय और निवेश संस्थानों से भारत में लंबी अवधि की संस्थागत पूंजी बढ़ाने का आह्वान किया है। टोक्यो में जापान की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान गोयल ने भारत की आर्थिक संभावनाओं और निवेश के नए अवसरों को सामने रखा।
जापानी निवेशकों के सामने भारत का रोडमैप
गोयल ने जापानी निवेश संस्थानों से भारत की विकास यात्रा में ज्यादा भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को केवल पूंजी की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे दीर्घकालिक साझेदारों की आवश्यकता है, जो तकनीक, नवाचार, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, रोजगार और वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ाव को भी मजबूत करें।
बैठक में जापान की प्रमुख वित्तीय और निवेश संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा का केंद्र भारत का आर्थिक परिदृश्य, निवेश के उभरते अवसर और जापानी संस्थागत निवेश को आसान बनाने के उपाय रहे।
10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य पर जोर
भारत-जापान निवेश संबंधों में जापान के 10 ट्रिलियन येन के निजी निवेश लक्ष्य को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच अगले दशक में जापानी निवेश को बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना है।
गोयल की ताजा अपील को इसी लक्ष्य को जमीन पर तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत चाहता है कि जापानी कंपनियां और वित्तीय संस्थान केवल सीमित निवेश तक न रहें, बल्कि भारत में नई क्षमता, तकनीक और दीर्घकालीन कारोबार विकसित करें।
सेमीकंडक्टर से AI तक कई सेक्टरों में अवसर
भारत ने जापानी निवेशकों के सामने कई उभरते क्षेत्रों में अवसरों को भी रखा है। इनमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रमुख हैं।
इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत होने के साथ नई तकनीकों और वैश्विक सप्लाई चेन में देश की भूमिका बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की पेशकश
गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में नई फैक्ट्रियां और उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारत की लागत प्रतिस्पर्धा, इंजीनियरिंग प्रतिभा और विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौतों को जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण फायदे के रूप में सामने रखा।
उन्होंने कंपनियों से भारत में सप्लाई चेन को मजबूत करने, स्थानीयकरण बढ़ाने तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने की अपील की।
जापानी कंपनियों के लिए भारत क्यों अहम?
भारत तेजी से बढ़ते घरेलू बाजार के साथ वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन और निर्यात का आधार बनने की कोशिश कर रहा है। गोयल ने जापान के निवेशकों को भारत में मौजूद संभावनाओं का इस्तेमाल करके वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन करने का संदेश दिया।
उन्होंने जापानी कंपनियों की भारत में सफल मौजूदगी का उदाहरण भी सामने रखा और कहा कि इस तरह की सफलता को दूसरे क्षेत्रों में दोहराया जा सकता है। खासतौर पर ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारत-जापान सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर है।
जापान के लंबे समय के निवेश से भारत को फायदा
जापान को लंबे समय के निवेश और पूंजी के लिए महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। Nippon Life India Asset Management के CEO सुंदीप सिक्का ने भी कहा है कि भारत और जापान के बीच भरोसा और आर्थिक संबंध मजबूत होने से जापान से संस्थागत और रिटेल निवेश बढ़ सकता है। उन्होंने जापान की दीर्घकालीन पूंजी और भारत में मौजूद निवेश अवसरों को एक-दूसरे के लिए पूरक बताया।
2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
गोयल ने जापानी निवेश संस्थानों के सामने भारत की लंबी अवधि की आर्थिक महत्वाकांक्षा भी रखी। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश, तकनीक और वैश्विक साझेदारियों की जरूरत होगी।
भारत सरकार का मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने में विदेशी संस्थागत पूंजी और रणनीतिक निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
भारत-जापान आर्थिक रिश्तों को नई दिशा
पीयूष गोयल की जापान यात्रा का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति देना है। वह 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं और उनके साथ 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधियों का दल है। प्रतिनिधिमंडल में मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, स्टील, ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
कुल मिलाकर, जापानी संस्थागत पूंजी को भारत की विकास यात्रा से जोड़ने की गोयल की अपील भारत-जापान आर्थिक साझेदारी के अगले चरण की ओर संकेत करती है। भारत चाहता है कि जापान की दीर्घकालीन पूंजी, तकनीक और विशेषज्ञता भारतीय बाजार की विकास क्षमता के साथ जुड़कर नई औद्योगिक और कारोबारी संभावनाएं पैदा करे।








