पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के बागी गुट ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) के पूर्ण पीठ के समक्ष अपनी दावेदारी पेश की है। बागी नेताओं का दावा है कि वे ही “वास्तविक तृणमूल कांग्रेस” का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने पार्टी के चुनाव चिह्न, संगठन और फंड पर अधिकार का दावा भी किया है।
जानकारी के अनुसार, बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जुड़वां फूल’ और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर अपना पक्ष रखा। बागी गुट का कहना है कि उन्हें पार्टी के अधिकांश विधायकों और संगठन के एक बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त है।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला आधिकारिक टीएमसी गुट इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बागी गुट का कोई संवैधानिक या संगठनात्मक आधार नहीं है और वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी की ओर से पहले भी बागी नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।
चुनाव आयोग के समक्ष यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यदि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में दो प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करते हैं, तो आयोग संबंधित नियमों के तहत दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला करता है। आयोग को यह तय करना होगा कि किस गुट को आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता दी जाए या आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी के भीतर यह विवाद और गहराता है, तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति और आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल चुनाव आयोग ने इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया जा रहा है।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर बनी हुई है। चुनाव आयोग के आगामी फैसले से यह स्पष्ट होगा कि पार्टी के संगठन, चुनाव चिह्न और आधिकारिक पहचान को लेकर उठे विवाद का समाधान किस दिशा में जाता है।








