कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के पास एक पत्थर खदान में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया है। अचानक चट्टान खिसकने से हुए इस हादसे में बिहार के आठ प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और रेस्क्यू टीमों को तुरंत राहत-बचाव कार्य में लगाया गया।
जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब खदान में मजदूर रोजमर्रा की तरह काम कर रहे थे। इसी दौरान ऊपरी हिस्से से भारी चट्टान का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया, जिससे कई मजदूर मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों और अन्य मजदूरों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, आपदा राहत दल और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से सभी मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी थी।
मृतकों की पहचान बिहार के अलग-अलग जिलों से आए प्रवासी मजदूरों के रूप में हुई है। वे रोजी-रोटी के लिए बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में काम कर रहे थे। हादसे के बाद उनके परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में खदान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या खदान में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और निगरानी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस हादसे के बाद इलाके में काम कर रहे अन्य मजदूरों में डर और असुरक्षा का माहौल है। प्रशासन ने सभी खदानों में सुरक्षा जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल राहत और बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को मुआवजे की घोषणा की संभावना भी जताई जा रही है।
यह दर्दनाक घटना एक बार फिर खदानों में सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।








