रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को ड्रोन हमलों की गूंज से दहल उठी। रूसी अधिकारियों के अनुसार, राजधानी और उसके आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर कई ड्रोन भेजे गए, जिनमें से अधिकांश को रूस की वायु रक्षा प्रणाली ने रास्ते में ही मार गिराने का दावा किया। हालांकि, कुछ स्थानों पर ड्रोन के मलबे गिरने और धमाकों की खबरों के बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
हमले के बाद मॉस्को के कई इलाकों में लोगों ने तेज धमाकों की आवाजें सुनने की बात कही। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में आसमान में धुएं के गुबार और एयर डिफेंस सिस्टम की गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया गया। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यूक्रेन की ओर से भेजे गए ड्रोन रूस के अलग-अलग क्षेत्रों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे। मंत्रालय के मुताबिक, वायु रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन को नष्ट कर दिया, जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
हमले के बाद राजधानी के कई हवाई अड्डों पर एहतियात के तौर पर उड़ानों के संचालन पर अस्थायी असर पड़ा। कुछ उड़ानों में देरी हुई, जबकि सुरक्षा जांच और हवाई यातायात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए गए। आपातकालीन सेवाओं को भी संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया।
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में हाल के महीनों में ड्रोन हमलों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, ऊर्जा ढांचे और रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाने के आरोप लगाते रहे हैं। रूस का कहना है कि यूक्रेन राजधानी तक हमले कर युद्ध का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि यूक्रेन आम तौर पर ऐसे हमलों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट टिप्पणी करने से बचता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी जैसे अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्र तक ड्रोन पहुंचने की घटनाएं रूस के लिए सुरक्षा चुनौती का संकेत हैं। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि रूस की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई है, क्योंकि अधिकांश मामलों में वायु रक्षा प्रणाली ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने का दावा करती रही है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच हमलों का दायरा लगातार बढ़ता रहा तो इससे संघर्ष और अधिक जटिल हो सकता है। इसके असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यूरोप की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध अब तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्ष लगातार नई सैन्य रणनीतियां अपना रहे हैं। ड्रोन तकनीक इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जिससे पारंपरिक युद्ध के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ऐसे हमले यह संकेत देते हैं कि युद्ध का प्रभाव अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी जैसे महत्वपूर्ण शहर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि “पुतिन तक पहुंची जंग की आंच” एक रूपकात्मक अभिव्यक्ति है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार ऐसा कोई पुष्टि किया गया दावा नहीं है कि हमला सीधे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निजी आवास या उनके व्यक्तिगत ठिकाने को निशाना बनाकर किया गया था। हमले का केंद्र मॉस्को और उसके आसपास के क्षेत्र बताए गए हैं।








