रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। रूस ने यूक्रेन के कई प्रमुख औद्योगिक शहरों पर मिसाइल, ड्रोन और ग्लाइड बमों से बड़े पैमाने पर हमले किए, जिनमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हमलों के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, सबसे अधिक नुकसान ड्नीप्रो शहर में हुआ, जहां रूसी मिसाइल हमले ने रिहायशी इलाकों और औद्योगिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। हमले में कई बहुमंजिला इमारतें, एक व्यावसायिक परिसर, स्कूल और अन्य सार्वजनिक भवन क्षतिग्रस्त हो गए। कई वाहन भी मलबे में दब गए और आग लगने की घटनाएं सामने आईं। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।
वहीं जापोरिज्जिया में रूस ने ड्रोन हमले किए। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, एक मिनीबस को निशाना बनाए जाने से कई लोग घायल हो गए। शहर के कई हिस्सों में बिजली और अन्य बुनियादी सेवाएं भी प्रभावित हुईं। इसके अलावा खार्कीव में रूसी ग्लाइड बमों से हमला किया गया, जिसमें कई नागरिक घायल हुए और आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचा।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूस लगातार नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं और यूक्रेन को अपनी वायु रक्षा प्रणाली मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों से अतिरिक्त सैन्य सहायता की आवश्यकता है। ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन को आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की अपील की।
दूसरी ओर, रूस की ओर से इन ताजा हमलों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, रूस पहले भी यह दावा करता रहा है कि उसके हमलों का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना है। वहीं यूक्रेन का आरोप है कि रूस लगातार नागरिक आबादी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर हमले कर रहा है।
फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ी है। खासकर पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के औद्योगिक क्षेत्रों में संघर्ष अधिक तेज बना हुआ है। इन इलाकों पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के हमले इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में युद्ध और अधिक तीव्र हो सकता है। लगातार हो रहे हवाई हमलों के कारण लाखों नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर संकट बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने और युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा।








