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June 28, 2026 7:43 pm

यूरिक एसिड बढ़ने का कारण सिर्फ मांस नहीं, दाल भी हो सकती है वजह?

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आमतौर पर माना जाता है कि यूरिक एसिड बढ़ने का मुख्य कारण केवल मांसाहारी भोजन है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। कुछ मामलों में शाकाहारी आहार, खासकर कुछ प्रकार की दालें और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ भी यूरिक एसिड के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन (Purine) नामक तत्व के टूटने से बनता है। यह तत्व कई तरह के खाद्य पदार्थों में पाया जाता है—चाहे वे मांसाहारी हों या शाकाहारी। जब शरीर में प्यूरीन की मात्रा अधिक हो जाती है या किडनी उसे सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती, तो यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है।

क्या दालें भी बढ़ा सकती हैं यूरिक एसिड?

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ दालें जैसे मसूर, अरहर और उड़द में प्यूरीन की मात्रा मध्यम स्तर पर होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दाल खाना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। समस्या तब बढ़ती है जब आहार में संतुलन नहीं होता और शरीर की मेटाबॉलिक क्षमता कमजोर हो जाती है।

डॉक्टरों के अनुसार, केवल दालें ही नहीं बल्कि अधिक मात्रा में चाय, कॉफी, प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय पदार्थ भी यूरिक एसिड को प्रभावित कर सकते हैं।

यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण

यूरिक एसिड बढ़ने पर शरीर में कई संकेत दिखाई दे सकते हैं, जैसे:

  • जोड़ों में दर्द और सूजन
  • पैरों के अंगूठे में तेज दर्द
  • सुबह उठने पर अकड़न
  • किडनी स्टोन बनने का खतरा
  • थकान और कमजोरी महसूस होना

डाइट में क्या बदलें?

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली और आहार में संतुलन बेहद जरूरी है:

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
  • कम प्यूरीन वाले भोजन का सेवन करें
  • हरी सब्जियां और फल बढ़ाएं
  • अत्यधिक प्रोटीन सेवन से बचें
  • मीठे और जंक फूड को सीमित करें

क्या दाल बंद करनी चाहिए?

डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि दालें पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है। बल्कि मात्रा और संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है। सही मात्रा में दालें शरीर के लिए फायदेमंद भी होती हैं क्योंकि इनमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर होता है।

निष्कर्ष

यूरिक एसिड बढ़ने का कारण केवल मांसाहारी भोजन नहीं है, बल्कि हमारी पूरी डाइट और जीवनशैली इसका प्रभाव डालती है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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