श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद संगठन के नेतृत्व और प्रबंधन में बदलाव की संभावनाएं बढ़ गई हैं। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि इस पर अंतिम फैसला अगली बैठक में लिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के ढांचे में व्यापक बदलाव पर विचार किया जा रहा है। इसी क्रम में पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट में और बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। ऐसी अटकलें हैं कि उन्हें महासचिव या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जैसी अहम भूमिका सौंपी जा सकती है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
हाल के दिनों में मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बाद ट्रस्ट सुर्खियों में रहा है। जांच के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल कर रहा है। इसी बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों ने ट्रस्ट के भीतर बड़े बदलाव की अटकलों को और तेज कर दिया है।
ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि श्रद्धालुओं के दान और मंदिर की संपत्तियां सुरक्षित हैं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाएगी। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफों पर अंतिम निर्णय अगली बैठक में लिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि भविष्य में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पेशेवर तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इसी कारण CEO जैसी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि नृपेंद्र मिश्रा की संभावित नियुक्ति को लेकर अभी तक ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल सभी की नजर ट्रस्ट की अगली बैठक पर टिकी है, जहां इस्तीफों पर फैसला होने के साथ-साथ नए नेतृत्व और संगठनात्मक बदलावों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।








