पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में शनिवार देर रात बड़ा आतंकी हमला हुआ, जब भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर धावा बोल दिया। शुरुआती धमाके के बाद पूरे इलाके में करीब 90 मिनट तक लगातार गोलीबारी होती रही, जिससे आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह आतंकवादी मारे गए, जबकि एक हमलावर को घायल अवस्था में जीवित गिरफ्तार कर लिया गया। इस हमले में चार रेंजर्स जवानों की भी मौत हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने विस्फोटकों से भरे वाहन के जरिए रेंजर्स परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार को निशाना बनाया। धमाके के बाद आतंकवादी परिसर में घुस गए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमले की सूचना मिलते ही सिंध रेंजर्स, स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (SSU), एंटी-टेररिस्ट फोर्स (ATF) और पुलिस की अतिरिक्त टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे क्षेत्र को घेर लिया।
सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर आतंकियों को घेर लिया। करीब डेढ़ घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद छह आतंकियों को मार गिराया गया, जबकि एक हमलावर को घायल हालत में गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आतंकी से पूछताछ की जा रही है ताकि हमले की साजिश, सहयोगियों और संभावित नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
हमले में चार रेंजर्स जवानों की जान चली गई और कई अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हुए। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पूरे परिसर में तलाशी अभियान चलाया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य आतंकी छिपा न हो। घटना के बाद आसपास की सड़कों को बंद कर दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह एक सुनियोजित आतंकी हमला प्रतीत होता है। सुरक्षा एजेंसियां हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों, विस्फोटकों और संचार नेटवर्क की जांच कर रही हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार का नाम सामने आया है, हालांकि जांच पूरी होने तक आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
हमले के बाद पाकिस्तान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने इसकी कड़ी निंदा की है। अधिकारियों ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और हमले के जिम्मेदार सभी लोगों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला दर्शाता है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठन अब भी बड़े सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।








