दक्षिण-पूर्व एशिया के द्वीपीय देश फिलीपींस में सोमवार सुबह आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी। कुछ ही सेकंड के झटकों ने पूरे इलाके को दहला दिया। कई इमारतें भरभराकर गिर गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
भूकंप का केंद्र दक्षिणी फिलीपींस के मिंदानाओ द्वीप के पास समुद्र में बताया गया है। झटके इतने तेज थे कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई शहरों में इमारतें जोर-जोर से हिलने लगीं और लोग घबराकर घरों, स्कूलों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। सबसे ज्यादा नुकसान जनरल सैंटोस सिटी और आसपास के इलाकों में हुआ, जहां कई भवन ढह गए और बुनियादी ढांचे को गंभीर क्षति पहुंची।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि कुछ इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। एक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन और कई अन्य संरचनाएं जमीन पर आ गिरीं। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
भूकंप के बाद सुनामी का खतरा भी पैदा हो गया था। प्रशांत महासागर क्षेत्र के कई देशों के लिए चेतावनी जारी की गई थी। कुछ तटीय इलाकों में समुद्र की लहरें सामान्य से ऊंची दर्ज की गईं, हालांकि बाद में सुनामी अलर्ट हटा लिया गया। इसके बावजूद प्रशासन ने लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी।
इस आपदा के कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं। राहत शिविरों में बड़ी संख्या में परिवारों को ठहराया गया है। कई स्कूल, सरकारी इमारतें और अस्पताल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिसके चलते प्रशासन को अस्थायी व्यवस्थाएं करनी पड़ी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं भी बाधित हुई हैं।
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है। सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई आफ्टरशॉक्स महसूस किए जा सकते हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।








