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May 19, 2026 9:09 pm

सरमथुरा तहसील में एसटी समुदाय पर अत्याचार और मानवाधिकार उल्लंघन का मामला गरमाया

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धौलपुर, 19 मई 2026: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली ने धौलपुर जिले की सरमथुरा तहसील के खिन्नोट गांव में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के कथित उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में संज्ञान लिया है। आयोग ने जिला प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हुए 4 सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने शिकायत संख्या 959/20/12/2026 पर सुनवाई के बाद धौलपुर जिला कलेक्टर को पत्र जारी किया। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि शिकायतकर्ता और पीड़ित पक्ष को साथ लेकर उचित कार्रवाई की जाए तथा की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी आयोग को उपलब्ध कराई जाए।

शिकायत में क्या आरोप लगाए गए?

यह शिकायत खिन्नोट गांव निवासी पूर्व कस्टम्स अधिकारी और आदिवासी मीणा पंच पटेल महापंचायत के जिला अध्यक्ष रामेश्वर दयाल द्वारा 23 अक्टूबर 2025 को राजस्थान सरकार, NHRC, एसडीएम सरमथुरा और जिला कलेक्टर धौलपुर को भेजी गई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरमथुरा क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से प्रशासन द्वारा भूमि अभिलेखों में महिलाओं के नाम दर्ज किए जाने के मामले में अनुसूचित जनजाति समुदाय को लगातार परेशान किया जा रहा है। रामेश्वर दयाल ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और एसटी समुदाय पर संगठित अत्याचार बताया है।

शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले का हवाला दिया है जिसमें कहा गया था कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम अनुसूचित जनजातियों पर स्वतः लागू नहीं होता। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन ने न्यायालय के निर्णयों को लागू नहीं किया और मामले को वर्षों से लंबित रखा।

रामेश्वर दयाल का बयान

रामेश्वर दयाल ने कहा, “कई दशकों से जिला धौलपुर ही नहीं, पूरे राजस्थान के आदिवासी और जनजाति समुदाय के लोगों को प्रशासन द्वारा एक षड्यंत्र के तहत परेशान किया जा रहा है। यह अत्याचार है और उत्पीड़न भी।”

एनएचआरसी के सेक्शन ऑफिसर पंकज कुमार कैन द्वारा जारी पत्र में मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा गया है। अब धौलपुर जिला प्रशासन पर जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

बड़े सवाल

स्थानीय स्तर पर यह मामला अब आदिवासी अधिकारों, भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि निर्धारित समय सीमा (4 सप्ताह) के अंदर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो मामला और अधिक संवेदनशील रूप ले सकता है।

NHRC के इस आदेश से सरमथुरा तहसील के खिन्नोट गांव समेत आसपास के आदिवासी इलाकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन अब इस मामले में क्या कदम उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

Reporter

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