भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक नया लैंड डील विवाद सामने आया है। दैनिक भास्कर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के करीब 50 IAS और IPS अधिकारियों ने अप्रैल 2022 में एक ही दिन भोपाल के कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव में लगभग 5 एकड़ (2.023 हेक्टेयर) कृषि भूमि खरीदी।
इस जमीन को ₹5.5 करोड़ में रजिस्टर्ड किया गया था। मात्र 16 महीने बाद अगस्त 2023 में मध्य प्रदेश कैबिनेट ने ₹3,200 करोड़ की लागत वाले वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी, जो इस जमीन से महज 500 मीटर की दूरी से गुजर रहा है। इसके बाद जून 2024 में भूमि का उपयोग कृषि से आवासीय में बदल दिया गया।
नतीजा? जमीन की कीमत आसमान छू गई। अब इसकी अनुमानित कीमत ₹55 करोड़ से ₹65 करोड़ के बीच बताई जा रही है — यानी 11 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी।
अफसरों का निवेश
- खरीदारों में मध्य प्रदेश कैडर के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा कैडर और दिल्ली में तैनात कई IAS-IPS अधिकारी शामिल हैं।
- सभी अधिकारियों ने एक ही रजिस्ट्री के जरिए जमीन खरीदी और इसे अपने अचल संपत्ति विवरण (IPR) में “like-minded officers” का निवेश बताया।
शिकायत और मांग
‘सिस्टम परिवर्तन अभियान’ नामक संगठन ने इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को शिकायत सौंपी है। संगठन ने बाईपास प्रोजेक्ट को रद्द करने की भी मांग की है।
सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी है। कई लोग इसे “ब्यूरोक्रेटिक इनसाइडर ट्रेडिंग” बता रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या अधिकारियों को प्रोजेक्ट की पहले से जानकारी थी?







