NITI Aayog की हालिया रिपोर्ट ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी योजनाओं और लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र बीच में ही स्कूल छोड़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, हर 10 में से लगभग एक छात्र अपनी पढ़ाई पूरी किए बिना ही स्कूल से बाहर हो जाता है। खासतौर पर Madhya Pradesh और Chhattisgarh की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक कमजोरी, पारिवारिक जिम्मेदारियां, शिक्षा की खराब गुणवत्ता और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी स्कूल छोड़ने की बड़ी वजह बन रही है। कई इलाकों में आज भी छात्रों को लंबी दूरी तय कर स्कूल पहुंचना पड़ता है। खासकर लड़कियों की पढ़ाई पर इसका ज्यादा असर देखा गया है, जहां सुरक्षा और सामाजिक कारणों के चलते कई छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मिड-डे मील, मुफ्त किताबें, छात्रवृत्ति और साइकिल योजना जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इनका असर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कोरोना महामारी के बाद कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए, जिसके कारण बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
Madhya Pradesh और Chhattisgarh के कई आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का बुनियादी ढांचा अब भी कमजोर है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, डिजिटल शिक्षा संसाधनों का अभाव और नियमित मॉनिटरिंग की कमी जैसी समस्याएं बच्चों को शिक्षा से दूर कर रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में इसका असर देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति पर पड़ सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों ने स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, शिक्षकों की नियुक्ति, करियर काउंसलिंग और परिवारों को आर्थिक सहायता देने जैसे कदमों पर जोर दिया है।
सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए नई शिक्षा नीति के तहत कई सुधार किए जा रहे हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना अब सबसे बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए क्या नए कदम उठाती हैं।







