मध्य पूर्व के बेहद संवेदनशील क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर गोलाबारी की घटनाओं ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। हालिया घटनाक्रम में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है, जिससे पहले से लागू सीजफायर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज के आसपास संदिग्ध नौकाओं और सैन्य जहाजों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद दोनों पक्षों की ओर से फायरिंग की खबरें सामने आईं। अमेरिकी नौसेना ने दावा किया है कि उसने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई की, जबकि ईरान ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को “रक्षात्मक” बताया है।
इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में हालात और बिगड़ गए जब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें आईं। इन हमलों में कुछ लोगों की मौत और कई के घायल होने की सूचना है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर सभी विवरणों की पुष्टि अभी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई गुजरती है, में बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।
अमेरिका और उसके सहयोगियों ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी आक्रामक कदम का “कड़ा जवाब” दिया जाएगा। इस स्थिति ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर संघर्ष के कगार पर ला खड़ा किया है।
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।







