देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले शिशुओं पर भी साफ नजर आने लगा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक तापमान के संपर्क में रहने से प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह की जटिलताएं बढ़ सकती हैं, जिनमें लो बर्थ वेट और समय से पहले डिलीवरी (प्रीमैच्योर बर्थ) का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, तेज गर्मी के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस बढ़ जाता है, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। पर्याप्त पानी न पीने और लंबे समय तक धूप में रहने से ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, जो बच्चे के वजन और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हीटवेव के दौरान गर्भवती महिलाओं को चक्कर आना, थकान, सिर दर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं। अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। खासतौर पर ग्रामीण और शहरी गरीब इलाकों में, जहां ठंडक के पर्याप्त साधन नहीं होते, वहां जोखिम और बढ़ जाता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि गर्भवती महिलाएं दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचें, ढीले और हल्के कपड़े पहनें, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें और खुद को ठंडे वातावरण में रखें। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी बेहद जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय पर पता लगाया जा सके।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि परिवार के सदस्यों को गर्भवती महिलाओं का खास ख्याल रखना चाहिए और उन्हें किसी भी तरह के तनाव या शारीरिक थकावट से बचाना चाहिए।
कुल मिलाकर, बढ़ती गर्मी के इस दौर में प्रेग्नेंसी के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, ताकि मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।







