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May 3, 2026 7:23 pm

विशेषज्ञों की राय—यह छवि बनाना एक सॉफ्ट पावर रणनीति भी हो सकती है

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अंतरराष्ट्रीय संबंधों और भू-राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा भारत को ‘हाथी’ और स्वयं को ‘ड्रैगन’ के रूप में प्रस्तुत करना केवल सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सॉफ्ट पावर रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक राजनीति में देश अक्सर प्रतीकों और छवियों के जरिए अपनी पहचान गढ़ते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि और प्रभाव को आकार दिया जा सके। चीन लंबे समय से इस तरह की नैरेटिव-बिल्डिंग (कथानक निर्माण) रणनीति अपनाता रहा है, जिसमें मीडिया, सांस्कृतिक प्रतीक और कूटनीतिक संदेश शामिल होते हैं।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि भारत को ‘हाथी’ के रूप में पेश करना एक ओर उसकी प्राचीन सभ्यता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है, तो दूसरी ओर यह उसे अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ने वाले देश के रूप में भी प्रस्तुत कर सकता है। वहीं ‘ड्रैगन’ की छवि चीन को ताकत, तेजी और आक्रामक विकास के प्रतीक के रूप में स्थापित करती है।

कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह की छवियों का उपयोग वैश्विक मंचों पर धारणा (perception) को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में किसी देश की भूमिका और प्रभाव को लेकर एक खास सोच विकसित करने की कोशिश होती है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे पूरी तरह रणनीतिक चाल मानने से इनकार भी करते हैं और इसे सांस्कृतिक संदर्भ में देखने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि एशियाई सभ्यताओं में जानवरों के प्रतीकों का उपयोग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी किया जाता रहा है, इसलिए इसे केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

कुल मिलाकर, यह बहस जारी है कि ‘ड्रैगन और हाथी’ की यह तुलना सिर्फ सांस्कृतिक प्रतीक है या फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक प्रभावशाली सॉफ्ट पावर टूल, जिसका उद्देश्य वैश्विक धारणा को प्रभावित करना भी हो सकता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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