फ्रेडरिक मर्ज ने डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति और खासतौर पर ईरान को लेकर अपनाई गई रणनीति पर तीखा हमला बोला है। हाल ही में दिए गए अपने बयान में जर्मन चांसलर ने कहा कि अमेरिका की मौजूदा रणनीति न सिर्फ असफल साबित हो रही है, बल्कि इससे वैश्विक स्तर पर अस्थिरता भी बढ़ रही है।
मर्ज ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के साथ निपटने के लिए जिस तरह की नीति अपनाई गई, वह “पूरी तरह फेल” रही है। उनका मानना है कि इस रणनीति के चलते ईरान और ज्यादा आक्रामक हुआ है, जबकि अमेरिका की साख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नुकसान पहुंचा है।
जर्मन चांसलर ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन के पास ईरान के साथ बढ़ते तनाव को खत्म करने के लिए कोई ठोस “एग्जिट प्लान” नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
मर्ज ने कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए कहा कि सैन्य दबाव और एकतरफा फैसलों के बजाय संवाद और बहुपक्षीय सहयोग ही इस संकट का स्थायी हल हो सकता है। उन्होंने यूरोपीय देशों से भी अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी का यह कड़ा रुख यूरोप और अमेरिका के बीच बढ़ते मतभेदों को भी उजागर करता है। जहां एक ओर ट्रंप प्रशासन सख्ती और दबाव की नीति पर जोर देता रहा है, वहीं यूरोपीय देश, खासकर जर्मनी, कूटनीति और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में हैं।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है—क्या ईरान जैसे जटिल मुद्दों से निपटने के लिए सख्ती कारगर है, या फिर संवाद और समझौते का रास्ता ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगियों की रणनीति किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।







