वैश्विक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा और सेंसेक्स करीब 755 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी तेज गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आया उछाल है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है, और यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। जैसे ही इस क्षेत्र में हालात बिगड़ने की खबरें आईं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें चढ़ गईं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ गया।
इसका असर शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टर्स पर पड़ा, लेकिन सबसे ज्यादा मार आईटी सेक्टर पर देखने को मिली। सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और कमजोर हो गया। निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया।
बाजार में गिरावट की एक और वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही। ग्लोबल अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित बाजारों में निवेश करते हैं, और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला। इससे भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं होता, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में भी शेयर बाजार पर दिख सकता है। खासतौर पर तेल-आधारित और आयात पर निर्भर कंपनियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती है।
फिलहाल, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है, और ऐसे में सोच-समझकर निवेश करना ही बेहतर रणनीति मानी जा रही है।







