नई दिल्ली/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता एक बार फिर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई है। इस पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ कहा कि दोनों देशों के बीच गहरा “मिस्ट्रस्ट” यानी अविश्वास ही सबसे बड़ी बाधा है, जिसे रातोंरात खत्म नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में हुई ये बातचीत कई घंटों तक चली, लेकिन अंत में कोई समझौता नहीं हो सका। वेंस ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत तो “काफी सार्थक” रही, लेकिन भरोसे की कमी के कारण कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई।
इस वार्ता के असफल होने की सबसे बड़ी वजह ईरान का अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख बताया जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान स्पष्ट रूप से परमाणु हथियार न बनाने का वादा करे, लेकिन ईरान इस पर सहमत नहीं हुआ।
वहीं, ईरान की तरफ से भी अमेरिका पर भरोसे की कमी जताई गई। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा और एकतरफा हैं, जिससे समझौता करना मुश्किल हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच दशकों पुराना तनाव और राजनीतिक टकराव इस अविश्वास की जड़ है। 1979 के बाद से अमेरिका-ईरान संबंध लगातार खराब रहे हैं, जिससे हर बातचीत में भरोसे की कमी बड़ी चुनौती बन जाती है।
हालांकि, वेंस ने उम्मीद जताई है कि बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और आने वाले दिनों में फिर से वार्ता शुरू हो सकती है।
फिलहाल, यह साफ है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की खाई कम नहीं होती, तब तक किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना मुश्किल रहेगा।







