नोएडा में बढ़ती महंगाई के खिलाफ मजदूरों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर सामने आने लगा है। लगातार बढ़ रही गैस सिलेंडर की कीमतें, कमरे का बढ़ता किराया और रोजमर्रा के खर्चों में इजाफा मजदूरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कम सैलरी में परिवार का गुजारा करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि उन्हें महीने में 10 से 12 हजार रुपये तक की ही सैलरी मिलती है, जबकि खर्च इससे कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। एक मजदूर ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, “सिर्फ गैस सिलेंडर और कमरे का किराया ही 7-8 हजार रुपये में चला जाता है, बाकी खर्च कैसे पूरा करें?” उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में इतनी कम सैलरी में परिवार चलाना लगभग असंभव हो गया है।
मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे 10 से 12 घंटे तक काम लिया जाता है, लेकिन इसके बदले न तो ओवरटाइम का पैसा मिलता है और न ही वेतन में कोई बढ़ोतरी की जाती है। उनका कहना है कि कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन कर्मचारियों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा।
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि न्यूनतम वेतन बढ़ाया जाए और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही, उन्होंने ओवरटाइम का उचित भुगतान और बेहतर कार्य परिस्थितियों की भी मांग की।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती रही और मजदूरी में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऐसे विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। मजदूर वर्ग पहले से ही आर्थिक दबाव में है और अब उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है।
फिलहाल, मजदूरों का यह आंदोलन एक बड़ा संकेत है कि बढ़ती महंगाई और कम आय के बीच का अंतर तेजी से बढ़ रहा है। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।







