एशिया के पूर्वी हिस्से में सामरिक गतिविधियां तेजी से बदल रही हैं और चीन के खिलाफ घेराबंदी की रणनीति मजबूत होती दिखाई दे रही है। इसी बीच भारत के एक अहम सहयोगी देश द्वारा लंबी दूरी तक मार करने वाले अत्याधुनिक “सुसाइड ड्रोन” (लोइटरिंग म्यूनिशन) और सस्ती लेकिन प्रभावी मिसाइलों के विकास की खबर ने क्षेत्रीय संतुलन को नया आयाम दे दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, विकसित किए जा रहे ये ड्रोन लगभग 1000 किलोमीटर तक की रेंज में सटीक हमला करने में सक्षम होंगे। इन्हें इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि ये लक्ष्य के ऊपर लंबे समय तक मंडरा सकते हैं और सही समय आने पर खुद को विस्फोट के साथ टकराकर लक्ष्य को नष्ट कर देते हैं। यही वजह है कि इन्हें “सुसाइड ड्रोन” कहा जाता है। इनकी लागत पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में काफी कम बताई जा रही है, जिससे इन्हें बड़े पैमाने पर तैनात करना संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक आधुनिक युद्ध की दिशा को बदल रही है। कम लागत में अधिक प्रभावी हमले की क्षमता के कारण छोटे और मध्यम आकार के देश भी अब बड़ी सैन्य ताकतों को चुनौती देने की स्थिति में आ रहे हैं। ऐसे में भारत के सहयोगी देशों की यह पहल क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
यह विकास उस समय हो रहा है जब पूर्वी एशिया में समुद्री सीमाओं, व्यापार मार्गों और सामरिक ठिकानों को लेकर तनाव बना हुआ है। चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में कई देश अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में जुटे हैं। भारत भी अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा को संतुलित करने की दिशा में काम कर रहा है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि 1000 किलोमीटर की रेंज वाले ये ड्रोन दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने और संवेदनशील ठिकानों पर सटीक हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। साथ ही, सस्ती मिसाइलों के साथ इनका संयोजन युद्ध के दौरान एक प्रभावी और किफायती रणनीति साबित हो सकता है।
हालांकि, इस तरह की सैन्य तैयारियों से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हथियारों की होड़ से सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
फिलहाल, इस विकास पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह नई सैन्य क्षमता क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को किस दिशा में ले जाती है।







