प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में दहशत का कारण बना लेपर्ड अब भी वन विभाग की पकड़ से बाहर है। बीते दिनों करीब 20 भेड़ों का शिकार करने के बाद यह खूंखार जानवर तीन जिलों की सीमाओं के बीच लापता हो गया है, जिससे वन विभाग की कार्रवाई जटिल होती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, लेपर्ड की गतिविधियां अलग-अलग जिलों की सीमा से सटे गांवों में देखी गई हैं। कभी यह एक जिले में दिखाई देता है तो कुछ ही समय बाद दूसरे जिले के इलाके में पहुंच जाता है। इस वजह से वन विभाग की टीमों को समन्वय स्थापित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अलग-अलग जिलों की टीमों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्टता न होने से रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
ग्रामीणों में लेपर्ड को लेकर भय का माहौल है। पशुपालक खासतौर पर चिंतित हैं, क्योंकि अब तक 20 से ज्यादा भेड़ों को यह अपना शिकार बना चुका है। कई गांवों में लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और अपने पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम कर रहे हैं।
वन विभाग ने लेपर्ड को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए हैं और निगरानी बढ़ा दी है। ड्रोन कैमरे और ट्रैकिंग टीमों की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, बार-बार सीमा पार करने के कारण सटीक लोकेशन मिलना मुश्किल हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही तीनों जिलों की संयुक्त टीम बनाकर समन्वित अभियान चलाया जाएगा, ताकि लेपर्ड को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की है।
फिलहाल, लेपर्ड की तलाश जारी है और वन विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जब तक इसे पकड़ा नहीं जाता, तब तक इलाके में डर और अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा।







