नई दिल्ली: डायबिटीज अब सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। हालिया मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, डायबिटीज और इंसुलिन रेसिस्टेंस के कारण लिवर (यकृत) को नुकसान पहुंच रहा है और धीरे-धीरे वह सख्त यानी “फाइब्रोसिस” की स्थिति में पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मरीजों में लंबे समय से ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहता, उनमें लिवर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, हर चार में से एक डायबिटीज मरीज में लिवर फाइब्रोसिस विकसित होने की संभावना होती है, जो आगे चलकर सिरोसिस और गंभीर लिवर फेलियर का कारण बन सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, इंसुलिन रेसिस्टेंस के चलते शरीर में फैट जमा होने लगता है, खासकर लिवर में। यह स्थिति नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के रूप में सामने आती है, जो समय के साथ फाइब्रोसिस में बदल सकती है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई मरीजों को देर से पता चलता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को नियमित जांच करवानी चाहिए, जिसमें लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड शामिल हैं। इसके अलावा, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और शुगर लेवल को सामान्य बनाए रखना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि अगर समय रहते जीवनशैली में बदलाव किया जाए तो लिवर को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। जंक फूड, अधिक फैट और शुगर वाले भोजन से परहेज करना और हेल्दी डाइट अपनाना इस खतरे को कम करने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, डायबिटीज मरीजों के लिए लिवर हेल्थ को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर इस गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।







