नई दिल्ली: तस्करी के मामलों में अब एक चौंकाने वाला नया ट्रेंड सामने आया है। जहां पहले सोना, ड्रग्स या वन्यजीवों की तस्करी की खबरें आती थीं, वहीं अब जिंदा चींटियों की तस्करी ने सबको हैरान कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, कुछ खास प्रजाति की चींटियां बाजार में हजारों रुपये में बेची जा रही हैं, जिससे इस अवैध कारोबार ने तेजी पकड़ ली है।
क्यों बढ़ रही है चींटियों की डिमांड?
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ दुर्लभ प्रजाति की चींटियों की मांग कई कारणों से बढ़ रही है:
- रिसर्च और साइंटिफिक स्टडी: कई वैज्ञानिक प्रयोगों में इनका उपयोग होता है
- एक्वेरियम और पालतू शौक: कुछ लोग इन्हें ‘एंट फार्म’ में पालने के लिए खरीदते हैं
- पारंपरिक औषधि: कुछ जगहों पर इन्हें औषधीय उपयोग के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है
हजारों में हो रही बिक्री
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक छोटी सी कॉलोनी या खास प्रजाति की चींटियों की कीमत हजारों रुपये तक पहुंच रही है। यही वजह है कि तस्कर इस नए कारोबार की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की आशंका
जांच एजेंसियों को शक है कि यह तस्करी केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी जुड़े हो सकते हैं। कई मामलों में विदेशी खरीदारों की भूमिका भी सामने आ रही है।
पर्यावरण पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तस्करी से जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। किसी एक क्षेत्र की प्रजाति को दूसरे क्षेत्र में ले जाने से पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ सकता है।
सख्ती की तैयारी
वन विभाग और अन्य एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा रही हैं। तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।
निष्कर्ष:
जिंदा चींटियों की तस्करी का यह नया ट्रेंड न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि पर्यावरण और कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है। समय रहते इस पर नियंत्रण जरूरी है।







