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March 28, 2026 6:28 pm

तेल संकट का खतरा! देश के पास महज 5 दिन का रणनीतिक भंडार

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक खुलासा सामने आया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के पास केवल लगभग 5 दिन का ही रणनीतिक कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का भंडार बचा है। इस स्थिति ने संभावित ऊर्जा संकट को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि देश के सर्वोच्च ऑडिट संस्थान Comptroller and Auditor General of India पहले ही इस खतरे को लेकर चेतावनी दे चुका था।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80-85% आयात करता है, जिससे वह वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव पर काफी हद तक निर्भर रहता है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति बाधित होती है या कीमतों में अचानक भारी उछाल आता है, तो देश के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। मौजूदा रणनीतिक भंडार इतनी बड़ी आबादी और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद सीमित माना जा रहा है।

Comptroller and Auditor General of India ने अपनी पिछली रिपोर्ट में भी कहा था कि भारत को अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) को और मजबूत करने की जरूरत है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया था कि किसी आपात स्थिति—जैसे युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक आपूर्ति संकट—के दौरान देश के पास पर्याप्त बैकअप होना चाहिए। लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित देशों के मुकाबले भारत का तेल भंडारण काफी कम है। उदाहरण के तौर पर कई बड़े देश अपने पास 60 से 90 दिनों तक का रणनीतिक भंडार रखते हैं, जबकि भारत अभी उस स्तर से काफी पीछे है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर अभी और काम करने की जरूरत है।

सरकार ने हालांकि इस स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम उठाने की बात कही है, जिनमें नए स्टोरेज फेसेलिटी का निर्माण और विदेशी साझेदारियों के जरिए भंडारण क्षमता बढ़ाना शामिल है। लेकिन इन परियोजनाओं को जमीन पर उतरने में समय लग रहा है।

इस मुद्दे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या भारत किसी बड़े वैश्विक संकट के लिए तैयार है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि देश को न केवल अपने तेल भंडार को बढ़ाना होगा, बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों—जैसे सौर और पवन ऊर्जा—की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ना होगा।

कुल मिलाकर, मौजूदा स्थिति एक चेतावनी की तरह है, जो यह संकेत देती है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में देश को ऊर्जा के क्षेत्र में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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