मध्य पूर्व में फरवरी के अंत से जारी भीषण ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध अब समाप्ति की राह पर दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बार फिर बड़ा ऐलान किया है कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की शर्त मान ली है। ट्रंप ने कहा, “वे कभी परमाणु हथियार नहीं रखेंगे। यह नंबर एक, दो और तीन है। उन्होंने इस पर सहमति जता दी है।”
ट्रंप ने फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में “मेजर पॉइंट्स ऑफ एग्रीमेंट” बन गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम पूरी तरह छोड़ने को तैयार है, साथ ही यूरेनियम संवर्धन (enrichment) बंद करने और मौजूदा संवर्धित यूरेनियम स्टॉक अमेरिका या IAEA को सौंपने पर भी चर्चा हो रही है। ट्रंप का कहना है, “हमने यह जंग जीत ली है। केवल फेक न्यूज ही इसे जारी रखना चाहता है।”
क्या है ट्रंप का पूरा दावा?
- ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा या रखेगा।
- ईरान की धरती पर कोई यूरेनियम संवर्धन नहीं होगा।
- ईरान के पास मौजूद 60% संवर्धित यूरेनियम (लगभग 440 किलोग्राम) को बाहर निकालना होगा।
- होर्मुज की खाड़ी को पूरी तरह खोल दिया जाएगा, ताकि तेल परिवहन सामान्य हो सके।
- ईरान अपने प्रॉक्सी गुटों (हिजबुल्लाह, हमास आदि) को समर्थन बंद करेगा।
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान को 15-पॉइंट प्लान भेजा है, जिसमें ये सभी शर्तें शामिल हैं। उन्होंने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले 5 दिनों के लिए टाल दिए हैं, ताकि बातचीत आगे बढ़ सके। ट्रंप का कहना है कि ईरान खुद डील करना चाहता है और “बहुत ज्यादा डील चाहता है”।
लेकिन ईरान का क्या कहना है?
ईरान की तरफ से इन दावों को “फेक न्यूज” करार दिया गया है। तेहरान ने साफ कहा है कि अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही और न ही कोई सहमति बनी है। ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि ट्रंप का बयान सिर्फ दबाव बनाने की कोशिश है। इस बीच ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागना जारी रखा है, जबकि अमेरिका-इजरायल संयुक्त हमले भी जारी हैं।
युद्ध की पृष्ठभूमि
- फरवरी 2026 में इजरायल ने ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हमले शुरू किए।
- अमेरिका ने भी शामिल होकर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के कई सैन्य नेता और वैज्ञानिक मारे गए।
- ईरान ने जवाब में इजरायल पर मिसाइल दागे और होर्मुज की खाड़ी को ब्लॉक करने की कोशिश की, जिससे वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू गईं।
- अब तक दोनों तरफ सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं और ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
क्या युद्ध वाकई खत्म हो जाएगा?
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का आशावादी स्वर सकारात्मक है, लेकिन ईरान की इनकार वाली मुद्रा से साफ है कि अभी रास्ता आसान नहीं। अगर 15-पॉइंट प्लान पर सहमति बनी तो मध्य पूर्व में लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम हो सकता है। लेकिन अगर बातचीत विफल रही तो अमेरिका फिर से “पावर प्लांट्स को तबाह करने” की धमकी दे चुका है।
ट्रंप ने कहा, “अगर डील नहीं हुई तो हम दिल से बमबारी करते रहेंगे।” फिर भी उन्होंने उम्मीद जताई कि “बहुत जल्द शांति का दौर आएगा” और इजरायल भी इससे खुश होगा।
अभी स्थिति क्या है? बातचीत जारी है, लेकिन दोनों तरफ हमले भी हो रहे हैं। अगले कुछ दिनों में साफ होगा कि ट्रंप का दावा हकीकत बनता है या सिर्फ डिप्लोमैटिक प्रेशर।
लाइव अपडेट: तेल की कीमतें 6% तक गिर गई हैं, क्योंकि बाजार को डील की उम्मीद है। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी ट्रंप के प्रयासों का समर्थन किया है।







