बिहार के बेतिया जिले के एक जवान की करगिल में ड्यूटी के दौरान दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पहाड़ी इलाके में तैनाती के दौरान अचानक चट्टान खिसकने से जवान उसके नीचे दब गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जैसे ही शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोग शहीद की एक झलक पाने के लिए घरों की छतों तक पर चढ़ गए।
ड्यूटी के दौरान हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार जवान करगिल के पहाड़ी क्षेत्र में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान अचानक पहाड़ से बड़े पत्थर गिरने लगे और वह उनकी चपेट में आ गए। साथियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सेना के अधिकारियों ने घटना की सूचना परिवार को दी, जिसके बाद गांव में मातम छा गया।
पार्थिव शरीर पहुंचते ही उमड़ा जनसैलाब
जब शहीद का पार्थिव शरीर बेतिया स्थित उनके पैतृक गांव पहुंचा तो पूरा इलाका लोगों से भर गया। आसपास के कई गांवों से लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोगों को छतों और दीवारों पर चढ़कर शहीद की अंतिम झलक देखनी पड़ी। हर तरफ “शहीद अमर रहे” के नारे गूंजते रहे।
पिता का दर्द सुनकर नम हुई आंखें
शहीद के पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने कहा,
“बेटा ही घर का सहारा था, अब घर कैसे चलेगा… हमें समझ नहीं आ रहा आगे क्या होगा।”
परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
पूरे गांव में शोक, लोगों ने दी श्रद्धांजलि
गांव के लोगों ने बताया कि शहीद जवान बहुत ही मिलनसार और मेहनती थे। बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे। उनके शहीद होने की खबर मिलते ही स्कूल, बाजार और कई दुकानों को बंद कर श्रद्धांजलि दी गई।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
प्रशासन और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में शहीद का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। जवानों ने सलामी दी और लोगों ने नम आंखों से अपने गांव के लाल को विदाई दी।
परिवार को मदद का आश्वासन
स्थानीय प्रशासन ने परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सुविधाएं परिवार को दिलाई जाएंगी।
निष्कर्ष
करगिल में हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। शहीद जवान की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ यह बता रही थी कि गांव को अपने लाल पर गर्व है, लेकिन परिवार के लिए यह दुख असहनीय है। पिता के मुंह से निकले शब्द — “घर कैसे चलेगा” — हर किसी की आंखें नम कर गए।






