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March 12, 2026 1:21 pm

अमेरिका की सख्ती: भारत-चीन समेत कई देशों पर टैरिफ जांच, व्यापार युद्ध फिर तेज?

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अमेरिका ने भारत, चीन और अन्य 14 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ अनुचित व्यापारिक प्रथाओं की नई जांच शुरू कर दी है। यह जांच Section 301 के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर द्वारा 11 मार्च 2026 को घोषित की गई, जिसके परिणामस्वरूप जुलाई तक इन देशों पर नए और भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार युद्ध फिर से तेज हो सकता है, खासकर ट्रंप प्रशासन की सख्त व्यापार नीति के कारण।

जांच का मुख्य कारण और दायरा

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन देशों में संरचनात्मक अतिउत्पादन (structural excess capacity) और अधिक उत्पादन (overproduction) की समस्या है। इसका मतलब है कि ये देश अपनी घरेलू मांग से कहीं ज्यादा सामान बना रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें गिर रही हैं और अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो रहा है। इससे अमेरिका में बड़े पैमाने पर व्यापार घाटा (trade deficit) बढ़ रहा है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है।

जांच में शामिल 16 देश/क्षेत्र हैं:

  • चीन
  • भारत
  • यूरोपीय संघ (EU)
  • जापान
  • दक्षिण कोरिया
  • मैक्सिको
  • वियतनाम
  • ताइवान
  • सिंगापुर
  • स्विट्जरलैंड
  • नॉर्वे
  • इंडोनेशिया
  • मलेशिया
  • कंबोडिया
  • थाईलैंड
  • बांग्लादेश

ये देश अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से हैं, और इनमें से कई एशियाई अर्थव्यवस्थाएं हैं जहां स्टील, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में भारी अतिउत्पादन देखा जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति और पृष्ठभूमि

फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के कई पुराने टैरिफ को गैर-कानूनी घोषित कर दिया था, जो IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए थे। कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लगा, क्योंकि इससे अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान हुआ। अब प्रशासन Section 301 कानून का इस्तेमाल कर नए टैरिफ लगाने की कोशिश कर रहा है, जो पहले भी चीन के खिलाफ सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया था।

USTR जेमीसन ग्रीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अमेरिका अब उन देशों के सामने अपनी औद्योगिक क्षमता को बलिदान नहीं देगा जो अतिउत्पादन की समस्या को अमेरिका पर थोप रहे हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच जुलाई तक पूरी हो सकती है, और इसके बाद नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। साथ ही, जबरन मजदूरी (forced labor) पर अलग जांच भी शुरू की जा रही है, जो लगभग 60 देशों को प्रभावित कर सकती है।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत इस जांच में शामिल होने से सबसे ज्यादा चिंतित है, क्योंकि अमेरिका भारत का एक प्रमुख निर्यात बाजार है। भारतीय निर्यात में टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और केमिकल्स जैसे क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। अगर नए टैरिफ लगे तो:

  • भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ेगी।
  • अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।
  • भारत-अमेरिका के बीच हाल के व्यापार समझौतों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, भारत पहले से ही Make in India और आत्मनिर्भर भारत जैसी नीतियों से घरेलू उत्पादन बढ़ा रहा है, लेकिन वैश्विक व्यापार युद्ध में भारत को सतर्क रहना होगा।

वैश्विक प्रभाव और विशेषज्ञों की राय

  • चीन पर पहले से ही भारी टैरिफ हैं, लेकिन नई जांच से और सख्ती आ सकती है।
  • EU और जापान जैसे सहयोगी देश भी नाराज हैं, जिससे अमेरिका के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि टैरिफ से सप्लाई चेन बाधित होंगी।
  • कई विश्लेषकों का कहना है कि यह ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति का अगला चरण है, जो अमेरिकी विनिर्माण को मजबूत करने का दावा करता है लेकिन वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकता है।

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि जांच में सार्वजनिक टिप्पणियां 17 मार्च से शुरू होंगी और 15 अप्रैल तक सबूत जमा किए जा सकते हैं। अंतिम फैसला आने तक दुनिया की नजर इस पर टिकी रहेगी कि क्या यह व्यापार युद्ध का नया दौर शुरू कर देगा।

Rashima Repoter
Author: Rashima Repoter

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