ईरान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम ने एएफसी महिला एशियन कप 2026 में अपने पहले मैच से पहले देश का राष्ट्रीय गान नहीं गाया था, जिससे घरेलू शक्ति‑वादी मीडिया ने उन्हें “गद्दार” कहकर आलोचना की। इससे खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उठीं, खासकर ईरान में राजनीतिक तनाव और हिंसा के बीच।
टीम ने बाद में दूसरे मैच से पहले गान गाया, लेकिन विरोध के निशान दिखाये, जिससे उनके खिलाफ गंभीर प्रतिक्रियाएँ और भी ज़्यादा बढ़ीं।
2. वापसी से इनकार — सुरक्षा की आशंका
एशियन कप में मैच खत्म होने के बाद टीम का अभियान समाप्त हुआ और अधिकांश खिलाड़ी वापस ईरान लौटने के लिए निकल गए। लेकिन कुछ खिलाड़ी — खासकर उन पांच प्रमुख सदस्यों ने — लौटने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे ईरान लौटते ही कठोर प्रतिशोध, गिरफ्तारी या कानून की कार्रवाई का सामना कर सकती हैं, विशेष रूप से “राष्ट्रगान न गाने” पर।
राष्ट्रवादी चिल्लरते टिप्पणियों और “गद्दार” जैसे आरोपों ने उनके खिलाफ लगातार माहौल बनाया।
3. ऑस्ट्रेलिया ने दिया शरण — समयबद्ध कार्रवाई
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इन खिलाड़ियों को मानवीय वीज़ा और अस्थायी शरण स्थल प्रदान किया। देश के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क और प्रधानमंत्री ने कहा कि वे सुरक्षित हैं और उन्हें रहने की अनुमति दी गई है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार शरण पाने वाली पाँच प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं:
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ज़हरा घानबरी (टीम कप्तान)
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ज़हरा सरबाली अलीशाह
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मोना हमौदी
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फातेमे पासन्दिदेह
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आतेफ़ा रमेज़ानीज़ादेह
ये निर्णय मार्च 9–10 को लिया गया और उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया जहाँ उन्हें प्रशासनिक सहायता और सुरक्षा दी जा रही है।
4. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और दबाव
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया से शरण देने की अपील की, यह कहते हुए कि यदि वे सुरक्षित न रह सकें तो अमेरिका उन्हें संरक्षण देगा।
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इज़राइल सहित कई देशों ने इन खिलाड़ियों के साहस की कद्र की है और कहा है कि उन्हें सुरक्षित वातावरण में खेल और जीवन का अधिकार होना चाहिए।
5. बाकी टीम और आगे की चुनौतियाँ
कुछ अन्य टीम सदस्य और स्टाफ ने भी ऑस्ट्रेलिया में असाइन करने की इच्छा जताई है, और कुल मिलाकर 7 से अधिक लोग ऐसे हैं जिन्होंने शरण का आवेदन किया। वहीं, कई खिलाड़ी और परिवार ईरान में अब भी तनाव और जोखिम का सामना कर रहे हैं।
निष्कर्ष
ईरान की महिला फुटबॉल टीम पर यह विवाद न सिर्फ खेल का मुद्दा बना बल्कि राजनीति, मानवाधिकार, और सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों को भी उजागर कर दिया। इन खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में शरण देना अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों, भेदभाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश माना जा रहा है।






