कोलकाता में चुनाव आयोग की महत्वपूर्ण बैठक में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित इस बैठक में भाजपा ने 16 सूत्री मांगों का एक चार्टर पेश किया, जबकि सीपीएम (माकपा) ने जोर देकर कहा कि मतदान अधिकतम दो चरणों में ही कराया जाए।
बैठक का माहौल गरमाया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्रीय बलों की प्रभावी तैनाती, हिंसा-मुक्त चुनाव, मतदाता सूची की शुद्धता और धांधली रोकने जैसी प्रमुख मांगें रखीं। पार्टी ने स्पष्ट रूप से मांग की कि चुनाव एक, दो या अधिकतम तीन चरणों में ही संपन्न हो, ताकि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहे और प्रक्रिया संक्षिप्त हो।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने कहा, “राज्य में हाल के वर्षों में हिंसा, धमकी और मतदाताओं को डराने की घटनाएं आम हो गई हैं। इसलिए हमने 16 सूत्री मांगों के जरिए आयोग से सख्त कदम उठाने की अपील की है।”
सीपीएम का रुख: दो चरणों से ज्यादा नहीं
वहीं, सीपीएम (माकपा) के प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में मतदाता सूची (SIR) को लेकर आयोग पर जमकर निशाना साधा। पार्टी नेता मोहम्मद सलीम ने कहा कि आयोग ने मतदाता सूची तैयार करते समय जनता को “दुश्मन” क्यों बनाया? उन्होंने आयोग को “यातना आयोग” तक कह डाला। सीपीएम ने स्पष्ट मांग की कि चुनाव एक चरण में हो तो सबसे बेहतर, लेकिन अधिकतम दो चरणों में ही कराया जाए। पार्टी ने 60 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों पर आपत्ति के मुद्दे पर भी गुस्सा जताया और कहा कि बिना इसकी समीक्षा के बहु-चरणीय चुनाव हिंसा को बढ़ावा देगा।
तृणमूल का हंगामा और आरोप
बैठक में तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भी जोरदार हंगामा किया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी प्रतिनिधि चंद्रमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त से भिड़ंत की और आरोप लगाया कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया। फिरहाद हकीम ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी बंगाल को “घुसपैठियों का अड्डा” मानती है, जबकि आयोग भाजपा की नजर से राज्य को देख रहा है। टीएमसी ने चरणों की संख्या पर सीधे टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन सुरक्षा और निष्पक्षता पर जोर दिया।
चुनाव आयोग की स्थिति
चुनाव आयोग ने सभी दलों के सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। बैठक के बाद आयोग की टीम राज्य प्रशासन के साथ और चर्चा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों की हिंसा को देखते हुए आयोग कम चरणों में मतदान की दिशा में विचार कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स पर निर्भर करेगा।
यह बैठक 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती है, जहां सभी दल निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर आयोग पर दबाव बना रहे हैं।






