भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 स्टेज में वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में शानदार 5 विकेट से जीत दर्ज की। कोलकाता में खेले गए इस मैच में संजू सैमसन ने नाबाद 97 रनों की दमदार पारी खेली, जिसके दम पर भारत ने 196 रनों के लक्ष्य को हासिल कर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने संजू सैमसन के बारे में कहा कि उन्हें कभी बाहर नहीं किया गया था, बल्कि सही समय के लिए संभालकर रखा गया था। गंभीर ने बोला, “हम जानते थे कि संजू में कितना दम है। उसके नाम तीन टी20 शतक हैं। हर खिलाड़ी खराब दौर से गुजरता है। कभी-कभी उसे दबाव से बाहर निकालना भी जरूरी होता है। हमें भरोसा था कि जरूरत पड़ने पर वह विश्व कप में जरूर प्रदर्शन करेगा।”
जसप्रीत बुमराह के इस्तेमाल पर गंभीर ने कहा कि वेस्टइंडीज के मध्यक्रम की ताकत को देखते हुए बीच के ओवरों में बुमराह की जरूरत थी, क्योंकि वह भरोसेमंद गेंदबाज हैं।
लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं गंभीर की उस टिप्पणी ने, जिसमें उन्होंने तिलक वर्मा और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ियों के छोटे-छोटे योगदान की सराहना की। जब उनसे तिलक और दुबे के बारे में पूछा गया, तो गंभीर ने तंज कसते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि आप हर योगदान के बारे में बात कर रहे हैं, क्योंकि कई सालों से हम सिर्फ कुछ खास योगदानों की ही बात करते आए हैं। मेरे लिए, शिवम की वो दो चौके उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने संजू के 97 रन।”
गंभीर ने आगे कहा कि बड़ा योगदान सुर्खियां बटोरता है, लेकिन छोटा योगदान जो टीम को जीत दिलाने में मदद करता है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह टिप्पणी कई लोगों को पुराने दिनों की याद दिला गई, खासकर 2007 और 2011 विश्व कप फाइनल में गंभीर के अपने महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर कम सराहे जाने वाले योगदान की, जहां क्रेडिट ज्यादातर कप्तानों को मिला।
यह जीत भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाती है, जहां 5 मार्च को मुंबई में इंग्लैंड से भिड़ंत होगी। गंभीर की यह बेबाकी और भावुक टिप्पणियां टीम के माहौल और उनके दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।






