शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर) को POCSO एक्ट के तहत दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। यहां मामले की पूरी विस्तृत जानकारी और अपडेट्स दी जा रही हैं (28 फरवरी 2026 तक की स्थिति के आधार पर):
मामले की पृष्ठभूमि
- FIR कब और कहां दर्ज हुई? यह मामला प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) के झूंसी थाने में 21-22 फरवरी 2026 के आसपास दर्ज किया गया। स्पेशल POCSO कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। शिकायतकर्ता आशुतोष पांडे (उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी) हैं, जो पूर्व में स्वामी के शिष्य रह चुके हैं।
- आरोप क्या हैं? आरोप नाबालिग शिष्यों (माइनर बच्चों) के साथ यौन शोषण, उत्पीड़न और संबंधित अपराधों से जुड़े हैं। आरोपों में कुंभ/माघ मेले के दौरान भी घटनाएं शामिल बताई गई हैं। लागू धाराएं: POCSO एक्ट की धारा 3, 4(2), 6, 16, 17, 51 आदि के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3)। आरोपी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी (प्रत्यक्षचैतन्य), और कुछ अज्ञात व्यक्ति।
- शंकराचार्य की प्रतिक्रिया स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को पूरी तरह झूठा, फर्जी और बदनामी की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि यह “एपस्टीन फाइल्स” जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। वे नार्को एनालिसिस टेस्ट (नार्को टेस्ट) कराने के लिए तैयार हैं ताकि सत्य सामने आए। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है।
हाईकोर्ट में सुनवाई और फैसला (27 फरवरी 2026)
- याचिका: गिरफ्तारी की आशंका में 24 फरवरी 2026 को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका दाखिल की गई।
- सुनवाई: जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने 27 फरवरी को लगभग 1 घंटे से अधिक समय तक सुनवाई की।
- बचाव पक्ष (वकील पीएन मिश्रा आदि): आरोप फर्जी, पुलिस रिपोर्ट में विरोधाभास, साजिशपूर्ण केस, कोई ठोस सबूत नहीं।
- सरकारी पक्ष और शिकायतकर्ता: आरोपी प्रभावशाली, गंभीर आरोप (माइनर पीड़ित), केस प्रभावित करने की आशंका।
- कोर्ट का आदेश:
- अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम फैसला सुरक्षित रख लिया गया।
- अंतरिम राहत: अंतिम फैसला आने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सह-आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक (स्टे) लगा दी गई। कोई दंडात्मक/कोर्सिव एक्शन नहीं लिया जाएगा।
- निर्देश: स्वामी को जांच में सहयोग करना होगा। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को 12 मार्च तक लिखित जवाब/प्रस्तुतियां दाखिल करने को कहा गया।
- अगली सुनवाई: मार्च 2026 के तीसरे हफ्ते में संभावित (होली अवकाश के बाद)।
राहत के बाद की स्थिति
- राहत मिलने पर अदालत में समर्थकों ने तालियां बजाईं और खुशी जताई।
- स्वामी ने प्रतिक्रिया में कहा: “झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती, सच सामने आ जाता है। कोर्ट ने हमारी दलीलों में दम पाया।”
- कुछ समर्थकों ने इसे “होली” की तरह मनाया।
- मामला धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ विपक्षी नेता इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
यह राहत अस्थायी है और अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी। जांच जारी है, और स्वामी को पुलिस/अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा। यदि कोई नया अपडेट आएगा, तो स्थिति बदल सकती है।
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