क्यूबा कई वर्षों से गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, जहां बिजली कटौती, ईंधन की कमी और आवश्यक सेवाओं में व्यवधान आम हो गए हैं। यह संकट पिछले महीने और भी गहरा हो गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जनवरी 2026 को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order 14380) पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश का नाम “Addressing Threats to the United States by the Government of Cuba” है, जिसमें क्यूबा को अमेरिका के लिए “असामान्य और असाधारण खतरा” घोषित करते हुए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई।
इस आदेश के तहत, अमेरिका उन देशों के आयातित सामानों पर अतिरिक्त ad valorem शुल्क (टैरिफ) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है, जो क्यूबा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कच्चा तेल या पेट्रोलियम उत्पाद बेचते या आपूर्ति करते हैं। यह कदम क्यूबा सरकार पर “अधिकतम दबाव” बनाने का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य क्यूबा में लोकतंत्र बहाल करना और शासन परिवर्तन लाना बताया जा रहा है।
मुख्य बिंदु:
- प्रभावित देश: मुख्य रूप से मेक्सिको (जो 2025 से क्यूबा का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता है), रूस, अल्जीरिया आदि। वेनेजुएला से तेल आपूर्ति पहले ही अमेरिकी कार्रवाइयों से रुक चुकी है।
- क्यूबा पर असर: आदेश के बाद क्यूबा के पास तेल भंडार सिर्फ 15-20 दिनों के बचे होने की रिपोर्ट्स आईं। इससे बिजली उत्पादन ठप होने, अस्पतालों में ईंधन की कमी, कचरा संग्रह रुकने, अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित होने और सार्वजनिक परिवहन ठप होने जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। क्यूबा सरकार ने इसे “ईंधन नाकाबंदी” करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और मानवीय संकट गहराने वाला बताया। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने चेतावनी दी कि इससे मानवीय संकट बढ़ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ टैरिफ वापस लिए जाने की बात भी आई, लेकिन संकट जारी है।
- ट्रंप प्रशासन का रुख: व्हाइट हाउस ने कहा कि यह कदम क्यूबा सरकार की “दुश्मन देशों, आतंकवादी समूहों” से सांठगांठ रोकने के लिए है। ट्रंप ने बार-बार कहा है कि क्यूबा को “कोई तेल या पैसा नहीं जाएगा” और उन्होंने क्यूबा से “डील” करने की अपील की है।
यह आदेश क्यूबा के लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक संकट को और गहरा कर रहा है, जहां पहले से ही खाद्य, दवा और बिजली की भारी कमी है। क्यूबा सरकार ने इसे “सामूहिक दंड” करार दिया है, जबकि अमेरिका इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रहा है।






