जयपुर: डिजिटल युग में इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। रोजाना हजारों लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार होकर लाखों-करोड़ों रुपये गंवा रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
साइबर सुरक्षा कंपनी SecurEyes के सह-संस्थापक एवं CEO कर्मेंद्र कोहली ने विशेष बातचीत में चेतावनी दी कि लोग प्रलोभन वाले ऐप्स और लिंक्स के झांसे में न आएं। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति या संस्था आपको फ्री में लाखों रुपये नहीं देती। ऐसे ‘लखपति-करोड़पति बनाने वाले’ ऑफर्स, अनचाहे SMS, कॉल या ईमेल में आए लिंक्स को देखते ही संदेह करें और उनसे दूर रहें।”
कोहली ने बताया कि पिछले 16 वर्षों से SecurEyes केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, पुलिस, सेना, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दे रही है। कंपनी ने 14 हजार से अधिक साइबर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। उन्होंने जोर दिया कि क्रिटिकल सेक्टर्स में उच्च स्तर की सुरक्षा जरूरी है, जैसे एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर, नियमित अपडेट और मजबूत पासवर्ड।
मुख्य सलाहें जो कोहली ने दीं:
- अनजान लिंक्स, ईमेल अटैचमेंट या कॉल पर कभी OTP शेयर न करें।
- प्रलोभन वाले ऐप्स (जैसे ‘फ्री में अमीर बनाओ’ वाले) को इग्नोर करें।
- डिवाइस में मजबूत एंटी-वायरस इंस्टॉल रखें।
- ई-कॉमर्स और बैंकिंग ऐप्स की सुरक्षा जांचें।
- अनचाहे मैसेज या कॉल से सतर्क रहें।
कोहली ने कहा कि आईटी सेक्टर ऐप्स बनाता है, जबकि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट उन्हें ‘हैक’ करके कमजोरियां ढूंढते हैं, ताकि उन्हें और मजबूत बनाया जा सके। भारत में साइबर सुरक्षा की परिपक्वता बढ़ रही है, लेकिन आम जनता में जागरूकता की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है।
सरकारी विभागों, बैंकों और संस्थाओं की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे लोगों को नियमित रूप से जागरूक करें, ताकि ठगी से बचा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग इन साधारण सावधानियों को अपनाएं, तो साइबर क्राइम में काफी हद तक कमी आ सकती है।
(स्रोत: कर्मेंद्र कोहली, CEO, SecurEyes से विशेष बातचीत)
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