शिमला में दिल्ली पुलिस और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच 20-24 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार गुरुवार (26 फरवरी 2026) सुबह खत्म हो गया। दिल्ली पुलिस की टीम तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके दिल्ली ले जा रही थी, लेकिन हिमाचल पुलिस ने उन्हें रोक लिया और कई बार हिरासत में लेने की कोशिश की। अंत में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस तीनों आरोपियों को लेकर रवाना हो गई। इस पूरे घटनाक्रम में हरियाणा पुलिस के जवान भी दिल्ली टीम के साथ शामिल थे।
मामला 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए शर्टलेस प्रदर्शन से जुड़ा है। यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान शर्ट उतारकर सरकार और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लगाए थे। इस घटना में अब तक 11 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब भी शामिल हैं।
बुधवार (25 फरवरी) सुबह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की 20 सदस्यीय टीम ने शिमला जिले के रोहड़ू सब-डिवीजन के चिड़गांव इलाके में एक होटल/रिजॉर्ट से तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं—सौरभ सिंह (उत्तर प्रदेश), अरबाज खान (उत्तर प्रदेश) और सिद्धार्थ अवधूत (मध्य प्रदेश)—को गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस ने तकनीकी निगरानी और पूर्व सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद टीम दिल्ली की ओर रवाना हुई, लेकिन सोलन जिले के धर्मपुर में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने उन्हें रोक लिया। हिमाचल पुलिस ने दावा किया कि गिरफ्तारी अवैध थी और आरोपियों को बिना उचित प्रक्रिया के जबरन ले जाया जा रहा था।
हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस टीम के खिलाफ अपहरण (kidnapping) का मामला दर्ज किया और कहा कि टीम ने रिजॉर्ट का सीसीटीवी DVR भी बिना जब्ती मेमो के ले लिया। दिल्ली पुलिस टीम को शोगी बैरियर के पास रोका गया, जहां दोनों राज्यों के पुलिस अफसरों के बीच तीखी बहस और आमने-सामने की स्थिति बनी। हिमाचल पुलिस ने दिल्ली टीम को हिरासत में लिया और शिमला जिला अदालत पहुंचाया।
शिमला पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, लेकिन मजिस्ट्रेट ने पूरी कार्रवाई की डिटेल मांगते हुए 24 घंटे का समय दिया। देर रात तीनों आरोपियों का दीनदयाल उपाध्याय जोनल हॉस्पिटल में मेडिकल जांच कराया गया। इसके बाद एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM II) एकांश कपिल के आवास पर पेश किया गया, जहां ट्रांजिट रिमांड मिली। हालांकि, गुरुवार सुबह कनलॉग इलाके में फिर से दिल्ली टीम को रोका गया, लेकिन अंततः कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए दिल्ली पुलिस को तीनों आरोपियों के साथ रवाना होने की अनुमति मिल गई।
यह घटनाक्रम केंद्र और कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के बीच राजनीतिक तनाव को भी उजागर करता है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी थी और आरोपियों पर दंगा, दुश्मनी फैलाने जैसे गंभीर आरोप हैं। हिमाचल पुलिस ने प्रक्रियात्मक उल्लंघन का हवाला दिया। अब तीनों आरोपियों को दिल्ली में पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उनकी पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग हो सकती है।






