प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल दौरे से पहले वहाँ की संसद (केनेसेट) में घरेलू राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इज़राइली विपक्षी दलों ने मोदी जी के संसद संबोधन का बहिष्कार करने की धमकी दी है, क्योंकि केनेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने परंपरा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष यित्ज़ाक (आइज़ैक) अमीत को विशेष सत्र में आमंत्रित नहीं किया है।
यह विवाद इज़राइल की न्यायिक सुधारों और सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को लेकर लंबे समय से चल रहे टकराव का हिस्सा है। विपक्षी नेता याइर लैपिड ने कहा है कि अगर अमीत को नहीं बुलाया गया, तो वे और उनके साथी सांसद सत्र में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि इससे संसद की गरिमा को ठेस पहुँचेगी और विदेशी मेहमान के सामने आधी खाली सदन की तस्वीर बनेगी। लैपिड ने चेतावनी दी कि इससे भारत जैसे बड़े देश के प्रधानमंत्री के सामने इज़राइल की शर्मिंदगी होगी।
दूसरी ओर, केनेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने स्पष्ट कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी आधी खाली संसद को संबोधित नहीं करेंगे। उन्होंने योजना बनाई है कि अगर विपक्ष बहिष्कार करता है, तो बहिष्कार करने वाले सांसदों की सीटें भरने के लिए पूर्व सांसदों (पूर्व एमके) को आमंत्रित किया जाएगा। इज़राइली पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘कान’ और हारेत्ज़ जैसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओहाना ने कहा, “चिंता मत कीजिए, मैं वादा करता हूँ कि पीएम मोदी आधी खाली प्लेनम को संबोधित नहीं करेंगे।”
यह पूरा मामला इज़राइल की आंतरिक राजनीति से जुड़ा है, जहाँ नेतन्याहू सरकार सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। मोदी जी का दौरा 25-26 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें वे इज़राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे और केनेसेट को संबोधित करेंगे। यह दौरा भारत-इज़राइल संबंधों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है, लेकिन घरेलू विवाद ने इसे सियासी विवादों में घेर लिया है।






